सिरोही। खेती की सीजन शुरू होने से पहले ही किसानों पर खाद संकट गहराने लगा है। सरकार की स्पष्ट रोक के बावजूद खाद कंपनियां और डीलर युरिया व डीएपी की खरीद पर टैगिंग का खेल जारी रखे हुए हैं। हालात यह हैं कि खाद डीलरों को इनकी मांग पर बायो फर्टिलाइजर, नैनो उत्पाद व केमिकल जैसे अन्य उत्पाद अनिवार्य रूप से खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। नतीजा यह कि डीलर अनावश्यक स्टॉक से बचने के लिए माल मंगवाने से कतरा रहे हैं और किसान खाद के लिए भटक रहे हैं।
किसानों पर दोहरी मार
खेती सीजन में किसानों के लिए युरिया व डीएपी अनिवार्य खाद है। लेकिन सहकारी समितियों और निजी डीलरों के पास खाद उपलब्ध ही नहीं हो पा रही। कंपनियों द्वारा थोपे जा रहे अतिरिक्त उत्पाद खरीदने से डीलर पीछे हट रहे हैं, और इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कई किसानों को बार-बार चक्कर काटने के बावजूद खाद नहीं मिल पा रहा।
टैगिंग से बढ़ रहा अनावश्यक बोझ