घटना के बाद से अस्पताल परिसर में रात को ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई। ग्रामीणों की मांग पर एसडीएम राजीव शर्मा ने कलेक्टर से विशेष अनुमति ली, जिसके बाद मेडिकल बोर्ड गठित किया गया, जिसमें डॉक्टर हेमेंद्र बंसल (Dr.hemendra Bansal), डॉ.गोविंद शर्मा (Dr.govind sharma) और डॉ. निर्भय गुर्जर (nirbhay gurjar) शामिल रहे।
रात 11 बजे पोस्टमॉर्टम (PM) करने के बाद शव परिजनों को सौंपा गया, जिसके बाद रात करीब 2 बजे दोनों मृतकों संजय और राजवीर का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों और परिजनों की आपसी सहमति से सुबह 8 बजे श्मशान में तीये की रस्म की गई। ग्रामीणों ने मंगलवार को गांव में तीये की रस्म टाली जाती है, इसलिए रविवार की सुबह ही आपसी सहमति से इसे कर दिया गया।
टीचर बनना चाहता था संजय
संजय और उसके बड़े भाई राहुल (rahul) की शादी करीब 5 साल पहले साथ साथ दो बहनों से हुई थी, लेकिन अभी तक संजय की पत्नी ससुराल नहीं आई थी। संजय बीएड करने के बाद रीट (REET) भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था। जबकि उसकी पत्नी अपने मायके छोंकरवाड़ा (भुसावर) में रहकर एसटीसी (BSTC) के बाद रीट भर्ती की तैयारी कर रही थी। संजय और उसकी पत्नी दोनों का सपना टीचर बनने का था।
संजय के पिता रामवीर और बड़ा भाई बयाना रीको एरिया में काम करते हैं। हादसे की सूचना मिलने पर संजय की पत्नी भी ससुराल पहुंची और घर पहुंचते ही बेसुध हो गई।
बुजुर्ग मां का सहारा था राजवीर
राजवीर के पिता प्रताप (pratap) की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। उसका बड़ा भाई दिव्यांग था, जो करीब पांच साल पहले घर से बिना बताए चला गया था। राजवीर पिता के देहांत के बाद से अपनी बुजुर्ग मां और खेती-बाड़ी सहित घर का पूरा काम संभाल रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि राजवीर परिवार में अकेला युवक था, जो मां के बुढ़ापे का सहारा था।
कोतवाली थाने के एएसआई जितेंद्र शर्मा (jitendra sharma) ने बताया कि घटना को लेकर मृतक संजय के ताऊ रामदेव पुत्र बहादुर ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। पट्टी टूटने से दोनों कुएं के अंदर गिर गए थे। कुएं के पानी में डूबने से दोनों की मौत हो गई।
फेफड़ों में पानी भरने से होती है मौत
CHC के सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमेंद्र बंसल (Dr.hemendra bansal) ने बताया- पानी में डूबने से व्यक्ति के फेफड़ों में पानी भर जाता है। इससे दम घुटने लगता है और व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है। फेफड़ों से पानी संचरण तंत्र में भी चला जाता है। 5 से 10 मिनट में व्यक्ति की मौत हो जाती है।