सम्मेलन में भारत माता मंदिर खिंवाड़ा एवं संस्कृति संरक्षण संस्थान के संयोजक इंद्र सिंह ने सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक षड्यंत्रकारी शक्तियाँ लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे माध्यमों से देश की सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में निर्धारित 'पंच परिवर्तन'—आदर्श हिंदू परिवार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव, स्व-आधारित जीवन और नागरिक कर्तव्य—को प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय मार्गदर्शन मंडल के सदस्य एवं मल्केश्वर मठ के महंत श्री तीर्थगिरी महाराज ने संघ की 1925 से 2025 तक की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन संघ सदैव धर्म रक्षा और राष्ट्र सेवा का पर्याय बना रहा। कार्यक्रम में निंबार्काचार्य पीठ ठाकुर दुवारा दासपां के महंत किशनदास जी महाराज और दूधेश्वर महादेव मठ के महंत चेतनगिरी जी महाराज का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।

समारोह में मातृशक्ति और युवाओं की भारी उपस्थिति ने राष्ट्रवाद के प्रति उत्साह को प्रदर्शित किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत मदन लाल जीनगर ने गुरु वंदना, निकिता रावल ने देशभक्ति गीत और निकिता सुथार ने भजनों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।

12वीं की छात्रा विनीता माली ने नारी शक्ति पर ओजस्वी उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन रामसीन खंड के बौद्धिक प्रमुख राकेश कुमावत ने किया। इस अवसर पर भीनमाल जिला प्रचारक बाबूलाल, जिला सह कार्यवाह राजेश कुमार, जालोर विभाग सेवा प्रमुख भूपेन्द्र कुमार सोलंकी सहित हजारों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सम्मेलन का समापन भारत माता की आरती और सामूहिक भोजन प्रसादी के साथ हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़ करना था।
