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किसे  डरा रही हैं 72 हूरें, अजमेर 92, डायरीज ऑफ़ वेस्ट बंगाल और गोधरा जैसी फ़िल्में  

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नौजवानों को मजहबी कटटरपंथी तत्वों द्वारा 72 हूरों का सपना दिखाकर जिहाद के रस्ते ले जाने की कहानियां आम रही है, लेकिन इसी मुद्दे पर बन रही 72 हूरें (72 Hoorain) रिलीज से पहले ही विवाद में कुछ इस तरह आ गयी है कि ’द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files ) और ’द केरला स्टोरी’...

HIGHLIGHTS

  1. 1 नौजवानों को मजहबी कटटरपंथी तत्वों द्वारा 72 हूरों का सपना दिखाकर जिहाद के रस्ते ले जाने की कहानियां आम रही है, लेकिन इसी मुद्दे पर बन रही 72 हूरें (72 Hoorain) रिलीज से पहले ही विवाद में कुछ इस तरह आ गयी है कि ’द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files ) और ’द केरला स्टोरी’ (The keral story ) की तरह इस फिल्म से भी विवाद शुरू हो गया है।
who is scared of films like 72 hoorain ajmer 92 diaries of west bengal and godhra
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Jaipur | हिंदी फिल्मों की कहानियां बदल रही हैं। फिल्मों के लिए गढे जाने वाले खलनायक बदल रहे हैं। लम्बे समय तक भारतीय फिल्मों के विषय गरीबों के शोषण, सामंती आतंक, पंडितों के असामाजिक व्यवहार जैसे कथानक के इर्द-गिर्द ही हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग बन रही है। 

अब फ़िल्में उन मुद्दों की तरफ जा रही है, जिस पर चर्चा से न सिर्फ सरकारें परहेज करती थी, बल्कि उन हालत में शायद सेंसर बोर्ड भी उन फिल्मों को इजाजत नहीं देता। 

वैसे तो बम्बई और गुजरात के दंगों पर भी उस दौर में फिल्म बनी लेकिन जितना विवाद कश्मीरी पंडितों के साथ बर्बर व्यवहार को दिखाने वाली और बीते साल प्रदर्शित ’द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files ) पर हुआ, उतना पहले कभी नहीं। 

अनुपमखेर अभिनीत ’द कश्मीर फाइल्स’ की ही तरह अभिनेत्री अदा शर्मा स्टारर फिल्म ’द केरला स्टोरी’ (The keral story ) ने विवादों के बीच जिस तरह बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़े, उसके बाद ऐसी फिल्मों के निर्माण की प्रक्रिया और भी तेज हो गयी है। 

क्यों डरा रही है 72 हूरें

वैसे तो नौजवानों को मजहबी कटटरपंथी तत्वों द्वारा 72 हूरों का सपना दिखाकर जिहाद के रस्ते ले जाने की कहानियां आम रही है, लेकिन इसी मुद्दे पर बन रही 72 हूरें (72 Hoorain) रिलीज से पहले ही विवाद में कुछ इस तरह आ गयी है कि ’द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files ) और ’द केरला स्टोरी’ (The keral story ) की तरह इस फिल्म से भी विवाद शुरू हो गया है।

गोवा  में हुए ‘भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह-2019’ के पैनोरमा खंड में 72 हूरें को खूब सराहा गया था। 

इसी फिल्म के लिए फिल्म के निर्देशक संजय पूरन सिंह को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया था। 

निर्देशक संजय पूरन सिंह चौहान की इस फिल्म का टीजर आते ही बाजार विवादों से गरमा गया। 

फिल्म पर एतराज कर रहे लोगों की दलील है कि 72 हूरें (72 Hoorain) सच से परे, इस्लाम को बदनाम करने के मकसद से बनायी गयी है। 

दलील है कि यह फिल्म कश्मीर और केरल की तथाकथित कहानियों की तरह इकतरफा सोच के साथ बनायी गयी है। 

72 हूरें का टीजर क्या रिलीज हुआ, विरोधियों ने बवाल मचा दिया।  

फिल्म का टीजर बताता है कि कट्टरपंथी नौजवानों को यह कहकर बरगलाते हैं कि जिहाद का रास्ता उन्हें सीधा जन्नत ले जाएगा, जहां 72 कुंआरी हूरें उनकी सेवा में होंगी। 

‘72 हूरें’ का यह छोटा-सा टीजर क्या आया, विवादों का बाजार गरम हो गया। 

आरोप है कि यह फिल्म इस्लाम को बदनाम करने के मकसद से  बनाई गई है। 

जवाब में तर्क है कि सिनेमा समाज का आइना होती है, यह फिल्म भी समाज के एक तबके को आइना दिखा रही है। 

संजय पूरन सिंह की दलील है कि 72 हूरें को आतंकवाद के नजरिये से देखा जाना चाहिए। 

फिल्म को मजहबी आधार पर देखा जाना ठीक नहीं। 

इस फिल्म का विरोध कर रहे लोग इसे बीते साल आई ‘द कश्मीर फाइल्स’ और हाल ही प्रदर्शित ‘द केरल स्टोरी’ की तरह ‘प्रोपोगेंडा फिल्म’ बता रहे हैं। 

दलील है कि संजय पूरन सिंह चौहान की इस फिल्म में भी उक्त दोनों फिल्मों की तरह इकतरफा बात कहने की कोशिश की गयी है। 

सता रहा है अजमेर 92 

‘72 हूरें’ पर उठा विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ कि अजमेर 92 और डायरीज ऑफ़ वेस्ट बंगाल का भी मुस्लिम संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। 

अजमेर 92 राजस्थान के अजमेर में हुए सबसे बड़े उस अजमेर ब्लैकमेल प्रकरण और सबसे बड़े सेक्स स्केंडल पर है, जिसकी वजह से कोई तीन सौ बच्चियों की ज़िन्दगी तबाह हो गयी थी। 

अश्लील फोटो खींच लड़कियों के यौन शोषण का मामला सामने आने के साथ ही अजमेर में कई लड़कियों ने आत्महत्या कर ली थी। 

इस सेक्स स्केंडल में कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी और ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़े कई खादिम थे। 

खुलासा होते ही कुछ लड़कियों ने शहर छोड़ दिया तो कुछ ने शहर छोड़ नयी जगह जिंदगी शुरू कर दी थी। 

इसी कथानक पर टिप्स रिसर्च बेस्ड फिल्म- अजमेर फाइल्स बना रहा है सो अलग। 

विवादों में घिरी डायरीज ऑफ़ वेस्ट बंगाल में तो ट्रेलर के आधार पर कोलकता के हेयर स्ट्रीटथाने में भी एक प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी। 

एफआईआर दर्ज होने पर मनोज मिश्रा ने कहा कि फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है। 

एफआईआर दर्ज करा लोग अभिव्यक्ति की आजादी का हनन कर रहे हैं। 

इन तीन फिल्मों को लेकर तो विवाद थमा ही नहीं कि 2002 में गोधरा में हुए जघन्य हत्या काण्ड पर भी फिल्म का एलान हो गया है। 

‘एक्सीडेंट और कांस्पिरेसी-गोधरा’ नाम से आ रही फिल्म भी विवाद की वजह बन जाए तो अचरज नहीं।

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