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राजस्थान

मानसून पर अल-नीनो का साया: अल-नीनो का असर: राजस्थान में मानसून में एक महीने की देरी संभव

बलजीत सिंह शेखावत

अल-नीनो के प्रभाव से राजस्थान में मानसून एक महीना लेट हो सकता है। IMD ने सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है।

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HIGHLIGHTS

  • अल-नीनो के कारण मानसून एक महीने तक लेट हो सकता है।
  • IMD ने सामान्य से कम बारिश (92% LPA) का अनुमान लगाया है।
  • मानसून मुंबई से करीब 300 किमी दूर ठहरा हुआ है।
  • देरी से खरीफ फसलों की बुवाई और पैदावार पर असर पड़ेगा।
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जयपुर |

राजस्थान में इस बार दक्षिण-पश्चिमी मानसून के आगमन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अल-नीनो के प्रभाव के कारण प्रदेश में मानसून के प्रवेश में करीब एक महीने की देरी होने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाकर चिंता बढ़ा दी है।

अल-नीनो का कहर और मानसून की धीमी चाल

मौसम विभाग के अनुसार, अल-नीनो के सक्रिय होने से मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बन पा रही हैं।

यही कारण है कि मानसून अभी भी मुंबई से लगभग 300 किलोमीटर दूर अटका हुआ है।

आने वाले दिनों में भी इसकी आगे बढ़ने की गति सामान्य से धीमी रहने की उम्मीद है।

IMD ने जुलाई से सितंबर के बीच मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश की घोषणा पहले ही कर दी थी।

आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, "जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मानसूनी बारिश दीर्घकालीन औसत (एलपीए) का करीब 92 प्रतिशत यानी सामान्य से कम रहने का अनुमान है।"

एलपीए के 90-95% के बीच वर्षा को 'सामान्य से कम' माना जाता है, जो चिंता का विषय है।

किसानों और फसलों पर संकट

मानसून में देरी और कम बारिश की दोहरी मार ने प्रदेश के किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

मानसून के समय पर न आने से खरीफ फसलों की बुवाई सीधे तौर पर प्रभावित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फसलों की पैदावार में कमी आ सकती है।

कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों के कुल रकबे और उत्पादन में भी गिरावट की संभावना है।

क्या है अल-नीनो?

अल-नीनो प्रशांत महासागर में पैदा होने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना है।

इसके सक्रिय होने पर भारतीय उपमहाद्वीप में हवा का दबाव बदल जाता है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।

इसके प्रभाव से अक्सर प्रभावित क्षेत्रों में सूखा या कम बारिश की स्थिति बनती है।

पिछले दशक के आंकड़ों को देखें तो मानसून आमतौर पर जून के अंत तक राजस्थान में प्रवेश कर जाता था। लेकिन इस बार अल-नीनो ने पूरी समीकरण को बदल दिया है, जिससे एक लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

यह देरी न केवल कृषि बल्कि राज्य की पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

*Edit with Google AI Studio

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