जयपुर | राजस्थान में मानसून ने करीब एक हफ्ते की देरी से 2 जुलाई को दस्तक दे दी है। इसके आने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाकर चिंता बढ़ा दी है।
मानसून: बारिश पर बड़ा अपडेट: राजस्थान मानसून: देरी से आया, क्या कम बरसेगा? जानें अपडेट
मानसून ने 25 जिलों को कवर किया, पर IMD ने इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है। जानें पूरी रिपोर्ट।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में मानसून ने निर्धारित तिथि से करीब एक सप्ताह की देरी से प्रवेश किया।
- IMD ने इस मौसम में सामान्य से 10% तक कम वर्षा का अनुमान लगाया है।
- अगले एक सप्ताह कोटा और उदयपुर संभाग में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
- पिछले साल अच्छी बारिश के बावजूद राज्य के 693 बांधों में से 319 अभी भी सूखे हैं।
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मानसून अब तक प्रदेश के करीब 25 जिलों को कवर कर चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। शुरुआती बारिश के आंकड़े सामान्य के करीब हैं, जो एक अच्छी शुरुआत का संकेत है।
प्रदेश में मानसून की अब तक की चाल
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि मानसून की उत्तरी रेखा वर्तमान में उदयपुर, अजमेर और झुंझुनूं से होकर गुजर रही है।
आगामी 3 से 4 दिन राज्य के अधिकांश शेष भागों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।
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पिछले 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान में मानसून सक्रिय रहा, जिसमें जयपुर में सबसे ज्यादा 84 एमएम बारिश दर्ज की गई। बीसलपुर बांध को भरने वाली त्रिवेणी नदी में भी पानी की आवक शुरू हो गई है।
कहां होगी भारी बारिश?
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में अगला एक सप्ताह मानसून सक्रिय रहेगा। विशेष रूप से कोटा और उदयपुर संभाग में भारी से अति भारी बारिश के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
हालांकि, बीकानेर संभाग और प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को अच्छी बारिश के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
क्या इस साल कम बरसेगा मानसून?
IMD ने इस सीजन में सामान्य से 10 प्रतिशत तक कम बारिश का अनुमान लगाया है। राजस्थान में मानसून की औसत वर्षा 435.6 मिमी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त में मानसून कमजोर रह सकता है, लेकिन सितंबर में विदाई से पहले यह फिर से मेहरबान हो सकता है।
बांधों की चिंताजनक स्थिति
देरी के बावजूद, अब तक राज्य में सामान्य के करीब 66 एमएम बरसात हो चुकी है, जो शुरुआती दौर के लिए अच्छा है। लेकिन चिंता की बात यह है कि पिछले साल अच्छी बारिश के बावजूद राज्य के 693 बांधों में से 319 पूरी तरह सूखे हैं।
केवल पांच बांध ही पूरी तरह से भरे हुए हैं, जो आने वाले समय में जल संकट की ओर इशारा करता है।
कुल मिलाकर, मानसून की शुरुआत ने गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन IMD के पूर्वानुमान और बांधों की मौजूदा स्थिति ने किसानों और आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि यह मानसून सीजन प्रदेश के लिए कैसा रहेगा।
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