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राजस्थान

राजस्थान में ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़: राजस्थान: 5 हजार का मकान और 2.5 लाख किराया, पकड़ी गई ड्रग्स फैक्ट्री

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बालेसर में 2.5 लाख किराया देकर चल रही थी ड्रग्स फैक्ट्री, पुलिस रेड में चली गोलियां और 6 गिरफ्तार।

HIGHLIGHTS

  • बालेसर के सुनसान खेत में चल रही थी एमडी ड्रग्स बनाने की अवैध फैक्ट्री।
  • गिरोह ने 5 हजार रुपये महीने वाले मकान का किराया 2.5 लाख रुपये दिया था।
  • पुलिस की छापेमारी के दौरान तस्करों ने की फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में 6 गिरफ्तार।
  • मास्टरमाइंड हापू राम के तार गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब से जुड़े मिले हैं।
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जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर जिले में पुलिस ने नशे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बालेसर में एक सुनसान खेत के बीच चल रही एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया है।

ऑपरेशन विषग्रहण: 5 हजार का मकान और 2.5 लाख किराया

पुलिस जांच में सामने आया कि जिस अधूरे मकान का किराया महज 5 हजार रुपये होना चाहिए था, तस्कर उसके लिए 2.5 लाख रुपये महीना दे रहे थे। यह जगह ड्रग्स बनाने के लिए सुरक्षित ठिकाना थी। जब एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने रात के अंधेरे में छापा मारा, तो वहां का नजारा बेहद चौंकाने वाला था। तस्कर बिना शर्ट और बनियान में ही खतरनाक केमिकल्स के बीच ड्रग्स बनाने में जुटे हुए थे।

पुलिस पर फायरिंग और 6 बदमाशों की गिरफ्तारी

पुलिस के पहुंचते ही फैक्ट्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे तस्करों ने गोलियां चलाना शुरू कर दिया। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घेराबंदी की और मौके से 6 शातिर बदमाशों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गैंग का सरगना हापू राम और मुख्य केमिस्ट नरेश शामिल हैं। इन लोगों ने जेल से बाहर आने के बाद पुराने साथियों को जोड़कर यह खतरनाक ड्रग्स साम्राज्य खड़ा किया था।

हाईटेक तरीके से चल रहा था मौत का कारोबार

तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए आईफोन और एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल किया। वे अपनी लोकेशन और बातचीत को पूरी तरह गुप्त रखते थे ताकि मोबाइल ट्रैकिंग से आसानी से बचा जा सके।

"इस गिरोह का नेटवर्क गुजरात और महाराष्ट्र से लेकर पंजाब तक फैला हुआ था, जहां से कच्चा माल मंगाकर ड्रग्स तैयार की जाती थी और फिर सप्लाई होती थी।"

गुजरात से पंजाब तक फैले हैं तस्करी के तार

जांच में खुलासा हुआ कि ड्रग्स बनाने के लिए केमिकल्स गुजरात और महाराष्ट्र से मंगवाए जाते थे। तैयार माल को बीकानेर के रास्ते उत्तर भारत और पंजाब की बड़ी मंडियों में खपाने की पूरी योजना थी। इस गिरोह में हर सदस्य का काम पहले से तय था। श्रवण और बुधराम केमिकल मिक्सिंग का काम करते थे। वहीं नरेंद्र नाम का आरोपी प्रोडक्शन का प्रभारी था, जो पहले भी हैदराबाद जेल में रह चुका है।

करीब डेढ़ महीने की निगरानी के बाद मिली सफलता

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस बड़े गिरोह तक पहुंचने के लिए करीब डेढ़ महीने तक गुप्त निगरानी रखी गई। बदमाशों की हर गतिविधि पर नजर रखने के बाद ही 'ऑपरेशन विषग्रहण' को अंजाम दिया गया। राजस्थान पुलिस की यह कार्रवाई राज्य में नशाखोरी के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल एक फैक्ट्री को बंद किया, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।

*Edit with Google AI Studio

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