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टीना-रिया डाबी का बड़ा तबादला: राजस्थान में IAS तबादलों की बड़ी लिस्ट: टीना डाबी बनीं टोंक की कलेक्टर, रिया डाबी को CMO में मिली एंट्री

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राजस्थान सरकार ने 65 IAS अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसमें टीना डाबी को टोंक और रिया डाबी को मुख्यमंत्री कार्यालय में नई जिम्मेदारी दी गई है।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान सरकार ने 65 आईएएस अधिकारियों के तबादले की सूची जारी की है।
  • टीना डाबी को बाड़मेर से हटाकर अब टोंक का नया जिला कलेक्टर बनाया गया है।
  • रिया डाबी को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में सचिव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • जयपुर कलेक्टर जितेंद्र सोनी को DIPR का नया निदेशक नियुक्त किया गया है।
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जयपुर | राजस्थान की प्रशासनिक मशीनरी में एक बार फिर बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने देर रात 65 आईएएस अधिकारियों के तबादले की सूची जारी की है। इस सूची के आने के बाद से ही पूरे प्रदेश के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा चर्चित आईएएस बहनें टीना डाबी और रिया डाबी की हो रही है। दोनों ही बहनों को सरकार ने महत्वपूर्ण और नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। टीना डाबी को अब टोंक का कलेक्टर बनाया गया है, जबकि रिया डाबी को मुख्यमंत्री कार्यालय में जगह मिली है।

टीना डाबी का टोंक तबादला और उसके मायने

टीना डाबी को सरहदी जिले बाड़मेर से हटाकर अब टोंक जिले का जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया है। बाड़मेर में उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई नवाचार किए थे, जिसकी काफी तारीफ हुई थी। अब उन्हें टोंक जैसी महत्वपूर्ण जगह पर भेजा गया है।

टोंक जिला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह जिला पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट का निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसे में वहां टीना डाबी की नियुक्ति को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सरकार ने टीना डाबी की कार्यशैली और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें इस चुनौतीपूर्ण जिले की जिम्मेदारी सौंपी है। टोंक में उनके सामने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी चुनौती रहने वाली है।

रिया डाबी को मिली CMO में बड़ी जिम्मेदारी

वहीं टीना डाबी की छोटी बहन रिया डाबी को भी सरकार ने बड़ी पदोन्नति के साथ नई जिम्मेदारी दी है। रिया डाबी को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में सचिव के पद पर तैनाती मिली है। यह उनके करियर के लिए एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्ति मिलना किसी भी युवा अधिकारी के लिए बहुत गौरव की बात होती है। यहां से वे सीधे राज्य की बड़ी नीतियों के क्रियान्वयन को करीब से देखेंगी। रिया डाबी ने अपनी पिछली पोस्टिंग में भी बेहतरीन काम किया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि रिया डाबी को यह जिम्मेदारी उनकी कार्यक्षमता और फाइलों के त्वरित निस्तारण की क्षमता के कारण मिली है। अब वे सीधे मुख्यमंत्री के साथ प्रशासनिक तालमेल बिठाने का काम करेंगी, जो एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

जयपुर और अन्य जिलों में भी बड़ा बदलाव

इस फेरबदल में केवल डाबी बहनें ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े नाम भी शामिल हैं। जयपुर के कलेक्टर जितेंद्र सोनी को भी बदला गया है। जितेंद्र सोनी को अब सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) में निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है।

उनकी जगह संदेश नायक को जयपुर का नया कलेक्टर बनाया गया है। संदेश नायक के पास अब राजधानी की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का जिम्मा होगा। इसके अलावा उदयपुर और बीकानेर में भी नए कलेक्टरों की नियुक्ति की गई है।

उदयपुर में गौरव अग्रवाल और बीकानेर में निशांत जैन को कमान सौंपी गई है। करौली में अक्षय गोदारा और जोधपुर में आलोक रंजन को भेजा गया है। जैसलमेर में अनुपमा जोरवाल और बाड़मेर में चिनमयी गोपाल को कलेक्टर बनाया गया है।

प्रशासनिक कसावट की ओर सरकार के कदम

सरकार के इस बड़े कदम को आगामी रणनीतिक तैयारियों और प्रशासनिक कसावट के रूप में देखा जा रहा है। कई जिलों में नए और ऊर्जावान चेहरों को मौका दिया गया है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचे।

प्रतापगढ़ में शुभम चौधरी और सीकर में आशीष मोदी को तैनात किया गया है। फलौदी में अंकित कुमार सिंह और बारां में बाल मुकुंद असावा को पोस्टिंग मिली है। सरकार चाहती है कि जनहित की योजनाएं धरातल पर पूरी पारदर्शिता के साथ उतरें।

इन तबादलों के जरिए मुख्यमंत्री ने यह साफ संदेश दिया है कि जो अधिकारी फील्ड में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें बड़ी और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। राजस्थान की नौकरशाही में इस बदलाव के बाद विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

यह फेरबदल राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। सभी की नजरें अब नए कलेक्टरों, विशेषकर टीना डाबी के टोंक में किए जाने वाले कार्यों पर टिकी रहेंगी।

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