उदयपुर | उदयपुर नगर निगम के आगामी चुनावों में एक अनूठी पहल देखने को मिली है, जहां पहली बार किसी किन्नर ने चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी पेश की है। वार्ड संख्या 60 से किन्नर मीरा राठौड़ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है।
उदयपुर: वार्ड 60 से किन्नर मीरा ने भरा नामांकन
उदयपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड 60 से किन्नर मीरा राठौड़ ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरा है। गौ सेवा के बाद अब वह जनसेवा करना चाहती हैं।
HIGHLIGHTS
- उदयपुर नगर निगम चुनाव में संभवतः पहली बार किसी किन्नर ने नामांकन भरा।मीरा राठौड़ ने वार्ड संख्या 60 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया।मीरा कई वर्षों से गौ सेवा कर रही हैं और एक गौशाला भी चलाती हैं।उन्होंने कहा कि वह स्वतंत्र रूप से बिना किसी दबाव के जनता की सेवा करना चाहती हैं।
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इस कदम को उदयपुर के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
उदयपुर चुनाव में पहली बार किन्नर उम्मीदवार
नामांकन प्रक्रिया के दौरान, मीरा राठौड़ अपने समर्थकों के साथ नामांकन स्थल पर पहुंचीं और अपनी उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा की।
यह संभवतः पहला अवसर है जब उदयपुर नगर निगम चुनाव में किसी थर्ड जेंडर समुदाय के सदस्य ने सक्रिय रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। जहां एक ओर भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मैदान में हैं, वहीं मीरा की उम्मीदवारी ने सभी का ध्यान खींचा है।
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गौ सेवा से जनसेवा का संकल्प
नामांकन दाखिल करने के बाद मीरा राठौड़ ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर जनता की सेवा करने का मन बनाया है।
मीरा ने कहा, "जब सरकार ने हमें पूरा अधिकार दिया है, तो मैं भी पार्षद बनकर जनता की सेवा करना चाहती हूं।"
मीरा पिछले कई वर्षों से गौ सेवा के कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वह अन्य लोगों के साथ मिलकर एक गौशाला का संचालन भी करती हैं। इसी सेवा भाव को अब वह बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं।
बिना दबाव के करेंगी वार्ड की समस्याओं का समाधान
मीरा राठौड़ ने अपने वार्ड की समस्याओं पर भी बात की। उन्होंने बताया कि उनके वार्ड में कई ऐसी समस्याएं हैं जो लंबे समय से अनसुलझी हैं।
उन्होंने कहा कि वह इन समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम में अपनी आवाज बुलंद करेंगी और लोगों को राहत दिलाने का हर संभव प्रयास करेंगी।
मीरा ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व पार्षदों ने समस्याओं को उठाने की कोशिश की, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना कर दिया गया।
इसी कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है, ताकि उन पर किसी भी पार्टी का कोई दबाव न हो और वह स्वतंत्र रूप से अपने वार्ड के लोगों की सेवा कर सकें।
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