जालोर में लिव-इन रिलेशनशिप पर विवाद: परिवार पर 31 लाख का जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार, एसपी से सुरक्षा की गुहार

जालोर में लिव-इन रिलेशनशिप के विवाद में एक परिवार पर 31 लाख का जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने एसपी से सुरक्षा मांगी है।

जालोर | राजस्थान के जालोर जिले में सामाजिक कुरीतियों और तालिबानी फरमानों का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। भीनमाल क्षेत्र के माली समाज के कुछ कथित पंचों पर एक परिवार का हुक्का-पानी बंद करने, उन्हें समाज से बहिष्कृत करने और 31 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाने का आरोप लगा है। यह पूरा विवाद एक युवक और युवती के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने से शुरू हुआ, जिसके बाद न केवल उस जोड़े को बल्कि उनकी सहायता करने वाले रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। बुधवार को डरे-सहमे पीड़ित परिवार ने जालोर पहुंचकर पुलिस अधीक्षक एसपी शैलेन्द्र सिंह से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई।

लिव-इन रिलेशनशिप से उपजा विवाद

मामले की शुरुआत भीनमाल निवासी बाबुलाल के साले के एक युवती के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने से हुई। बाबुलाल ने एसपी को दी गई रिपोर्ट में बताया कि उनके साले ने 26 अगस्त 2025 को आपसी सहमति से इकरारनामा तैयार करवाया था और वे साथ रह रहे थे। हालांकि, यह फैसला समाज के कुछ कट्टरपंथी तत्वों और लड़की के परिजनों को रास नहीं आया। इसके बाद से ही दोनों को जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। अपनी जान को खतरा देखते हुए जोड़े ने जोधपुर हाईकोर्ट की शरण ली, जहां से उन्हें पुलिस सुरक्षा और संरक्षण के निर्देश दिए गए थे।

पंचायत का तुगलकी फरमान और 31 लाख का जुर्माना

आरोप है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, भीनमाल में समाज के कुछ कथित पंचों ने एक अनौपचारिक पंचायत बुलाई। इस पंचायत में कानून को ताक पर रखते हुए युवक पर 31 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया गया। इतना ही नहीं, युवक की मदद करने वाले उसके साडू पांचाराम माली को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। पांचाराम का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया और उन्हें समाज से पूरी तरह बहिष्कृत करने का फरमान सुनाया गया। जब परिवार ने इस अन्यायपूर्ण फैसले का विरोध किया, तो पूरे परिवार को ही सामाजिक अपमान और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा।

वापसी के लिए 11 लाख की मांग

पीड़ितों का आरोप है कि पंचों ने उन्हें समाज में वापस शामिल करने के लिए 11 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग रखी है। इस प्रताड़ना से तंग आकर पांचाराम और उनके साले ने 9 जनवरी को भीनमाल थाने में 7 नामजद पंचों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराना पंचों को और भी नागवार गुजरा। आरोप है कि 20 जनवरी को बाबुलाल को एक पंच के घर बुलाकर धमकाया गया कि उन्होंने पुलिस को बयान क्यों दिए। उन्हें चेतावनी दी गई कि अब उन पर और भी बड़ा जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें माली समाज की पांच पट्टियों से बाहर कर दिया जाएगा।

एसपी से न्याय की उम्मीद

लगातार मिल रही धमकियों और सामाजिक बहिष्कार के कारण परिवार का जीना दूभर हो गया है। बुधवार को बाबुलाल माली और पांचाराम माली ने जालोर एसपी शैलेन्द्र सिंह के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने कथित पंचों समरथाराम, दीपाराम, बाबुलाल, जगदीश, मांगीलाल, सोमताराम और सरदाराराम के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने, मामले की निष्पक्ष जांच करने और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है। यह घटना आधुनिक समाज में आज भी व्याप्त पुरानी और दमनकारी सामाजिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।