जयपुर |राजस्थान की राजधानी में सियासी हलचल तेज हो गई है। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। यह घोषणा लंबी बैठकों और गहन विचार-विमर्श के बाद हुई।
जयपुर नगर निगम चुनाव: BJP की सूची जारी, पूर्व मेयर को पार्षद का टिकट
जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन भाजपा ने लंबी मंत्रणा के बाद अपनी सूची जारी की। इसमें कांग्रेस से आईं पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को पार्षद का टिकट देना चर्चा का विषय बन गया है।
HIGHLIGHTS
- जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए भाजपा ने आखिरी दिन सूची जारी की।कांग्रेस से आईं पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को पार्षद का टिकट मिला।बगावत रोकने के लिए उम्मीदवारों को सीधे सिंबल दिए गए।पार्टी अब 2 सितंबर तक बागियों को मनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
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आखिरी दिन तक चली माथापच्ची
भाजपा के लिए प्रत्याशियों का चयन करना एक बड़ी चुनौती थी। शहर के 150 से अधिक वार्डों में टिकट के लिए मजबूत दावेदारों की लंबी कतार थी, जिससे पार्टी के भीतर बगावत की आशंका भी बढ़ गई थी।
इस स्थिति से निपटने के लिए भाजपा प्रदेश कार्यालय में देर रात तक बैठकों का दौर चला। इन बैठकों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और जयपुर के वरिष्ठ प्रभारियों ने हिस्सा लिया।
लंबी मंत्रणा और सभी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखने के बाद, नामांकन के अंतिम क्षणों में उम्मीदवारों को पार्टी का अधिकृत सिंबल और सूची सौंपी गई।
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को पार्षद का टिकट
इस सूची का सबसे चर्चित नाम जयपुर की पूर्व महापौर (मेयर) ज्योति खंडेलवाल का है। कभी कांग्रेस की कद्दावर नेता रहीं और जयपुर की पहली महिला मेयर बनने का गौरव हासिल करने वाली ज्योति खंडेलवाल को भाजपा ने अब एक वार्ड पार्षद का टिकट दिया है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्योति खंडेलवाल ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।
मेयर से पार्षद तक का सफर
ज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस में एक वार्ड पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वह मेयर के पद तक पहुंचीं और जयपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी भी बनीं।
अब भाजपा में शामिल होने के बाद, वह एक बार फिर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत पार्षद के चुनाव से कर रही हैं। इस फैसले ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा की एक रणनीति हो सकती है, जिसके तहत उन्हें जमीनी स्तर पर खुद को साबित करने की चुनौती दी गई है। वहीं, उनके समर्थक इसे पार्टी के प्रति उनकी सेवा और समर्पण के एक नए अध्याय के रूप में देख रहे हैं।
प्रमुख चेहरों पर भाजपा का दांव
भाजपा द्वारा जारी की गई सूची में कई अन्य प्रमुख नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। पार्टी ने पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ-साथ दूसरे दलों से आए नेताओं पर भी भरोसा जताया है।
- नीरज अग्रवाल: वार्ड 121 से नीरज अग्रवाल को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। वह पहले भी पार्षद रह चुके हैं और हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
- अनुराधा माहेश्वरी: भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अनुराधा माहेश्वरी को वार्ड 107 से चुनावी मैदान में उतारा गया है।
बगावत रोकने की अनूठी रणनीति
टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा के भीतर जबरदस्त खींचतान देखने को मिली। कई वार्डों में एक ही सीट पर 10 से 15 मजबूत दावेदार थे, जिससे बगावत का खतरा बढ़ गया था।
पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित था कि टिकट कटने से नाराज नेता निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर सकते हैं या किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं।
इसी बगावत को रोकने के लिए पार्टी ने एक खास रणनीति अपनाई। प्रत्याशियों की सूची को सार्वजनिक रूप से जारी करने के बजाय, चयनित उम्मीदवारों को सीधे फॉर्म-बी और पार्टी सिंबल सौंपे गए। इसका उद्देश्य यह था कि नामांकन की समय सीमा समाप्त होने तक किसी भी संभावित बगावत के असर को कम किया जा सके।
अब बागियों को मनाने की चुनौती
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब भाजपा का अगला कदम असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाना है। पार्टी की चुनावी टीम इस काम में जुट गई है।
पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि 2 सितंबर, 2026 तक नाम वापसी की अंतिम तिथि से पहले सभी बागी उम्मीदवारों के नामांकन वापस करवाए जाएं। इससे पार्टी को चुनावों में वोटों के बंटवारे को रोकने में मदद मिलेगी और अधिकृत प्रत्याशी की जीत की राह आसान होगी।
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