नेपाल त्रासदी: भेड़ पालकर पाला, अब लाशों में ढूंढ रहा इकलौता बेटा
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में 23 वर्षीय पुलिसकर्मी आशीष लापता हो गए हैं। उनका परिवार, विशेषकर उनके पिता, जिन्होंने भेड़ पालकर उन्हें पाला था, अब उन्हें लाशों के बीच तलाश रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 23 वर्षीय पुलिसकर्मी आशीष लापता।भेड़ पालकर बेटे को बड़ा करने वाले पिता अब लाशों में अपने इकलौते बेटे को ढूंढ रहे हैं।आशीष केवल 17 महीने पहले ही नेपाल पुलिस में शामिल हुए थे और यह उनकी पहली पोस्टिंग थी।नेपाल और तिब्बत में इस त्रासदी से मरने वालों की संख्या 810 तक पहुंच गई है, जबकि 3,048 लोग अब भी लापता हैं।
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नेपाल में आई विध्वंसकारी बाढ़ ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए हैं। किसी का पिता लापता है, तो किसी का भाई नहीं मिल रहा। कई पत्नियां अपने पति के लौटने का इंतजार कर रही हैं। इन्हीं में से एक परिवार कपिलवस्तु का भी है, जो अपने 23 वर्षीय बेटे आशीष के लौटने की उम्मीद लगाए बैठा है।
कौन हैं लापता पुलिसकर्मी आशीष?
‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, 23 साल के आशीष नेपाल पुलिस में थे। वह रसुवा के मैलुंग स्थित एक पुलिस पोस्ट पर तैनात थे। बाढ़ आने के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। पांच दिन गुजर चुके हैं, लेकिन परिवार अब भी उनके लौटने की उम्मीद में जी रहा है।
पिता का दर्द: 'भेड़ पाल कर पाला है'
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आशीष के पिता खेदू के लिए यह दर्द असहनीय है, क्योंकि आशीष उनका इकलौता बेटा है। पिता ने भेड़ें पालकर अपने बेटे को बड़ा किया और पढ़ाया-लिखाया था। आज वही मजबूर पिता बहकर आई लाशों के ढेर में अपने जिगर के टुकड़े को तलाशने के लिए मजबूर है।
पत्नी से हुई आखिरी बातचीत
आशीष की पत्नी प्रियंका के लिए यह मुसीबत एक फोन कॉल के साथ शुरू हुई। सुबह करीब 8:30 बजे उनकी अपने पति से बात हो रही थी, तभी अचानक फोन कट गया। प्रियंका ने दोबारा कॉल करने की कोशिश की, लेकिन फोन नहीं लगा। कुछ देर बाद फोन अनरीचेबल हो गया।
करीब आधे घंटे बाद उन्हें बाढ़ की खबर मिली, जिसके बाद उनकी चिंता डर में बदल गई। प्रियंका कहती हैं कि पांच दिन से उन्हें आशीष के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है, लेकिन वह अब भी उनके लौटने का इंतजार कर रही हैं।
17 महीने पहले ही शुरू की थी नौकरी
आशीष ने सिर्फ 17 महीने पहले ही नेपाल पुलिस की नौकरी शुरू की थी। उन्होंने नौ महीने की कठिन ट्रेनिंग पूरी की थी और मैलुंग उनकी पहली पोस्टिंग थी। जब बाढ़ के बाद नीचे की तरफ बहकर आई लाशों को अस्पताल लाया गया, तो परिवार कपिलवस्तु के एक अस्पताल पहुंचा। उन्हें उम्मीद थी कि शायद आशीष का कोई सुराग मिल जाए, लेकिन वहां भी निराशा ही हाथ लगी।
'बेटा जिंदा लौट आए'
पिता खेदू की आंखों में अब भी उम्मीद की एक किरण बाकी है। वह कहते हैं, 'आशीष मेरा इकलौता बेटा है। मैंने उसे बहुत मुश्किलों से पाला है।' अब उनकी बस एक ही दुआ है कि उनका बेटा जिंदा और सुरक्षित घर लौट आए।
अस्पतालों में अपनों की तलाश
सिर्फ आशीष का परिवार ही नहीं, बल्कि कई और लोग भी अपनों की तलाश में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। हेमनाथ न्यूपाने भी तीन दिन से अस्पतालों में भटक रहे हैं। उनकी जेब में करीब 28 साल के प्रकाश देवकोटा की तस्वीर है, जो रसुवा में कस्टम एजेंट थे और बाढ़ के बाद से लापता हैं। न्यूपाने हर अस्पताल में तस्वीर दिखाकर पुलिसकर्मियों से पूछते हैं कि क्या यह चेहरा किसी शव से मिलता है।
त्रासदी का बढ़ता आंकड़ा
नेपाल और तिब्बत में इस त्रासदी से मरने वालों का आंकड़ा 810 तक पहुंच गया है। इनमें नेपाल के 794 और तिब्बत के 16 लोग शामिल हैं। दोनों देशों में 3,048 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ परिवारों की बेचैनी बढ़ रही है, लेकिन उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है।
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