बहते शब्द
नीलू की कविता: चंपा अब क्यों नहीं आती
बड़े बड़े घूघरों वाली जोड़ों को ठणमणाती वो अपने सिर पर लेकर चलती थी पूरा का पूरा शॉपिंग मॉल
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