🏷️ rajasthan
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बहते शब्द
नीलू की कविता: नव वर्ष शुभ हो
तुम्हारा वर्तमान होना प्रसव पीड़ा और आज अतीत हो जाना उंगलियों से उर्मियों के फिसल जाने सदृश अन्तिम दिवस अपनी देहरी स...
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नीलू की कलम से: पुस्तक समीक्षा : बीज हूँ मैं
ये दो पंक्तियाँ आपको सहज आकर्षित करती है फिर शब्दों का ऐसा सम्मोहन कि आप उनमें खो जाते हैं और एक के बाद एक कविता पढ़ते च...
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नीलू की कलम से: मुण्डक उपनिषद्
आचार्य अंगिरा के प्रति शौनक ऋषि का प्रश्न है- "कस्मिन्नु भगवो विज्ञाते सर्वमिद विज्ञात भवतीति।" जिज्ञासु के प्रश्न से आ...
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बहते शब्द
नीलू की कविता: चंपा अब क्यों नहीं आती
बड़े बड़े घूघरों वाली जोड़ों को ठणमणाती वो अपने सिर पर लेकर चलती थी पूरा का पूरा शॉपिंग मॉल
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