ये कदम थिरके आवर्ष
तुम्हारी लय पर
देखे रंग शुभाशुभ
निमित्त बने तुम पीड़ा और संत्रास
अनदेखे अनसुने अनुभवों का
तुम्हारे प्रवाह में सम्मोहन था
कि सम्मोहन में प्रवाह
प्रवाहित मुझे ही होना था
लिखा तुमने
भोगा मैंने!
तुम्हारा वर्तमान होना प्रसव पीड़ा
और आज अतीत हो जाना
उंगलियों से उर्मियों के फिसल जाने सदृश
अन्तिम दिवस अपनी देहरी से
सकुशल सम्मान विदा देने के लिए
आभार सखे!
तुम अद्भुद थे
परस्पर मुक्ति शुभ हो।
नव वर्ष शुभ हो।
- नीलू शेखावत
नीलू की कविता: नव वर्ष शुभ हो
तुम्हारा वर्तमान होना प्रसव पीड़ा और आज अतीत हो जाना उंगलियों से उर्मियों के फिसल जाने सदृश अन्तिम दिवस अपनी देहरी से सकुशल सम्मान विदा देने के लिए
ताज़ा खबरें
भारत-अमेरिका व्यापार डील पर संकट के बादल: अगले हफ्ते वॉशिंगटन जाएगा भारतीय प्रतिनिधिमंडल, टैरिफ और Section 301 जांच पर होगी चर्चा
होर्मुज स्ट्रेट पार कर कांडला पहुंचा भारतीय एलपीजी पोत 'जग विक्रम', 15 जहाज अब भी फंसे
राजनीति
तमिलनाडु राजनीति में उबाल: सीएम स्टालिन के बयान पर भाजपा का कड़ा प्रहार, 'संविधान विरोधी' बताकर घेरा
राज्य
CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई बोर्ड ने जारी किया 10वीं का रिजल्ट, ऐसे करें मार्कशीट डाउनलोड
राजनीति