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राजस्थान

संत समागम में जन्मोत्सव: स्वामी सदानन्द सरस्वती का वर्धापन दिवस मनाया गया

गणपत सिंह मांडोली

पथमेड़ा के नंदगाँव में द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती का जन्मोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया, जिसमें कई संत-महात्मा शामिल हुए।

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HIGHLIGHTS

  • जगद्गुरु स्वामी सदानन्द सरस्वती का वर्धापन दिवस पथमेड़ा गोधाम में मनाया गया।'विवेकचूडामणि' के गुजराती अनुवाद सहित दो ग्रंथों का विमोचन हुआ।देशभर से संत-महात्मा और विद्वान कार्यक्रम में शामिल हुए।तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पत्र भेजकर शुभकामनाएं दीं।
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रेवदर |पथमेड़ा गोधाम के नंदगाँव में चातुर्मास्य के पावन अवसर पर द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर परमपूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन जन्मोत्सव एवं वर्धापन दिवस श्रद्धा, भक्ति, ज्ञान और धर्म के वातावरण में भव्य रूप से मनाया गया।

आदि शंकराचार्य की अखण्ड ज्ञान परंपरा के गौरव जगद्गुरु महाराज के अवतरण दिवस पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्मा, दंडी स्वामी, ब्रह्मचारी, विद्वान और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्रियों ने भेजीं शुभकामनाएं

जन्मोत्सव के इस विशेष अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पत्र भेजकर पूज्य महाराज श्री को जन्मोत्सव की शुभकामनाएं प्रेषित कीं और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

गोपूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

वर्धापन दिवस का शुभारंभ प्रातःकाल गोमाता के पूजन से हुआ। पूज्य जगद्गुरु महाराज ने पथमेड़ा गोधाम की गोसेवा एवं गोसंरक्षण की परंपरा के अनुरूप गोमाता का पूजन किया।

इसके पश्चात पूज्य गौऋषि दत्त शरणानन्द जी के साथ गोवर्धन भगवान का पूजन किया गया।

धर्म और ज्ञान का संदेश

सुरभि गोपूजन और गोवर्धन पूजन के बाद महाराज श्री गौचारण के लिए प्रस्थान किए। बाद में उन्होंने भक्तों को दर्शन देकर धर्म, ज्ञान, गुरु-भक्ति, परोपकार और आत्मचिंतन का संदेश दिया।

‘विवेकचूडामणि’ के गुजराती अनुवाद का विमोचन

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण आदि शंकराचार्य प्रणीत महान अद्वैत वेदान्त ग्रंथ ‘विवेकचूडामणि’ के गुजराती अनुवाद का विमोचन रहा।

संस्कृत मूल ग्रंथ एवं हिन्दी रूपांतरण पूर्व में ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी द्वारा तैयार किया गया था, जबकि इसका गुजराती अनुवाद गुजरात के श्री गौतम पटेल जी ने किया है।

जगद्गुरु स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज के करकमलों से इस महत्वपूर्ण ग्रंथ का विमोचन किया गया।

एक और ग्रंथ का विमोचन

इसी अवसर पर ‘श्री गुरु व्यासपूजन पद्धति’ ग्रंथ का भी विमोचन हुआ। उपस्थित विद्वानों ने इसे वेदान्त और गुरु परंपरा के ज्ञान को जनभाषा तक पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

संतों और विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति

इस भव्य समारोह में कई प्रतिष्ठित संत-महात्माओं और विद्वानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

  • दंडी स्वामी दामोदरानन्द आश्रम जी
  • गोपालानन्द तीर्थ जी
  • सिद्धानन्द आश्रम जी
  • राघवानन्द तीर्थ जी
  • तीर्थानन्द ब्रह्मचारी जी
  • ब्रह्मचारी सहजानंद जी

इनके अतिरिक्त जूना अखाड़ा से संबंधित स्वामी थानापति रविन्द्रानन्द जी ने भी पूज्य महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।

विद्वानों की सभा

काशी से मीमांसा दर्शन के विद्वान आचार्य कमलाकान्त त्रिपाठी, परमेश्वर दत्त शुक्ल तथा द्वारका से महामहोपाध्याय जयप्रकाश नारायण द्विवेदी की उपस्थिति ने समारोह को एक विद्वत्सभा का स्वरूप प्रदान किया।

गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया तथा राज्यसभा सांसद बाबूभाई देसाई भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

सत्संग से मन की निर्मलता का संदेश

अपने आशीर्वचन में जगद्गुरु महाराज ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न मानकर उसे जीवन के आचरण, विवेक, कर्तव्य और लोकमंगल से जोड़कर समझाया।

उन्होंने सत्संग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्संग की हर बात याद रहना आवश्यक नहीं है, लेकिन उसका प्रभाव मन को निर्मल और पवित्र करता है।

प्रेम और विवेक का महत्व

महाराज श्री ने श्रीराम-विश्वामित्र प्रसंग का उदाहरण देते हुए प्रेम और गुरु-विवेक का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि प्रेम जब गुरु के विवेक से जुड़ता है तो वह मोह नहीं, बल्कि धर्म बन जाता है।

उन्होंने वेदान्त के माध्यम से माया, जीव, ईश्वर, आत्मा और अद्वैत के सिद्धांतों का सरल भाषा में विवेचन किया।

युवाओं को विशेष संदेश

युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिभा केवल डिग्री नहीं, ज्ञान केवल स्मरण नहीं, धन केवल संग्रह नहीं और धर्म केवल पूजा नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि जब ज्ञान विवेक बनता है, विवेक आचरण बनता है और आचरण लोकमंगल का माध्यम बनता है, तभी जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है।

इसी मंगलभाव के साथ नंदगाँव में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन जन्मोत्सव गोसेवा, गुरु-भक्ति, वेदान्त ज्ञान, संत-संग और धर्मचिंतन के अनुपम संगम के रूप में संपन्न हुआ।

*Edit with Google AI Studio

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