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नीलू की कलम से: मीरा इतनी सस्ती नहीं, ना ही ऐसी साधना आसान।
लोग हमसे भी अपने विचार रखने को कह रहे हैं। उन्हें अपेक्षा है कि मैं 'आधुनिक मीरा' शीर्षक से बहुत बड़ा लेख लिखूंगी। 'अहो'...
रघुराम और राहुल की कदमताल के क्या मायने: राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ों यात्रा में शामिल हुए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन राहुल गाँधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए। आइए जानते हैं रघुर...
नीलू की कलम से: चदरिया ऊनी रे ऊनी...
चादर ओढ़े हुए स्त्री-पुरुष वैसे भी आकर्षक लगते हैं फिर बल्डी और पट्टूडे़ के तो कहने ही क्या। बल्डी में रंग और पैटर्न सी...
कांग्रेस और राहुल गांधी की यात्रा: पदयात्रा के बहाने पद पाने की चाहत में सुनील दत्त की वे यात्राएं जो मानवता की मिसाल हैं
गहलोत और पायलट के बीच एक इंटरव्यू के बाद एक बार फिर से खड़ी हुई रार बिठाने की कोशिश भी संगठन महासचिव वेणुगोपाल ने साफ क...
नीलू की कलम से: धन ए माता राबड़ी
राबड़ी सर्वथा त्रिदोष रहित है क्योंकि वात का शमन बाजरी करती है, पित का शमन छाछ और कफ का शमन सांभरिया लूण। राबड़ी नितांत...
नीलू की कलम से: पट्टे की पूछ
सच पूछिए तो ये पट्टे वाले प्राणी कुत्ते जैसे लगते भी नहीं। कुत्तों की अपनी एक बिरादरी है पूरी ठसकदार और खानदानी। ठसक देख...
नीलू की कलम से: मुकातो
मारवाड़ी बोलना गलत है तो घर,परिवार और समाज बोलता क्यों है? हिंदी बोलना ही अच्छा है तो किसीने अब तक सिखाई क्यों नहीं? पर...
नीलू की कलम से: कीवी v/s काचरा
एक जमाना था जब 'एक अनार सौ बीमार' की कहावत चलती थी पर अब तो 'एक कीवी- दीर्घजीवी' की कहावत आने वाली है। हाल-चाल पूछने वाल...
नीलू की कलम से: उकारड़ा
हमारे यहां इसे अकुरड़ा या अकुरड़ी कहते हैं।सामान्यतः हिंदी में इसे कचरे और गोबर का ढेर कहा जा सकता है,पर वास्तव में यह ए...
नीलू की कलम से: वाल्मीकि समाज और राजपूताने की परम्पराएं
रावळों के साथ वाल्मीकि परिवार का संबंध व्यवसायिक न होकर व्यक्तिगत रहा है। प्रत्येक रावळे का अपना एक मेहतर होता है जो उनक...
नीलू की कलम से: तिंवार
छोटी-छोटी डावड़ियां व सुहाग-भाग की चाहने वाली नारियों के शृंगार का त्योहार गणगौर होलिका-दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण एकम...
नीलू की कलम से: फाग (फागणियो)
मगर गुस्सा निकालने का शिष्ट तरीका भी कोई मुरधर की मरवणियों से सीखे। अश्लील तो दूर, अशुभ भी न बोलेगी पर झुंझलाहट तो हो रह...
नीलू की कलम से: ऋतुनां कुसुमाकरः
जिस प्रकार ब्रह्म अक्षर व अक्षय है वैसे ही ऋतुएं भी निरंतर व अंतरहित है। शतपथ में ऋतुओं को विनाश रहित कहा गया है। ऋतुएं...
नीलू की कलम से: फिल्म समीक्षा : उड़ता तीर
फेसबुक स्क्रोल करते हुए यूं ही फिल्म की प्रमोशनल पोस्ट पर नज़र पड़ गई।फिल्म पैड थी मगर पोस्ट में फिल्म के कंटेंट को लेकर...