नई दिल्ली | टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आगाज हो चुका है और क्रिकेट जगत की निगाहें इस मेगा इवेंट पर टिकी हुई हैं। अब तक खेले गए शुरुआती छह ग्रुप स्टेज मुकाबलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का टूर्नामेंट बेहद रोमांचक होने वाला है। एक महीने तक चलने वाले इस खेल महाकुंभ में कुल 55 मैच आयोजित किए जाएंगे जिसमें ग्रुप स्टेज के 40 मैचों के अलावा 12 सुपर-8 मैच दो सेमीफाइनल और एक भव्य फाइनल शामिल है।
आईसीसी ने पहले ही तय की सुपर-8 की रूपरेखा
इस बार का टूर्नामेंट टी20 वर्ल्ड कप 2024 के सफल फॉर्मेट पर आधारित है। इसमें पांच-पांच टीमों के चार अलग-अलग ग्रुप बनाए गए हैं। आईसीसी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सुपर-8 की आठ संभावित टीमों की सीडिंग पहले से ही तय कर ली है और उन्हें ग्रुप X और ग्रुप Y में विभाजित कर दिया है। इस रणनीतिक निर्णय के पीछे मुख्य कारण ब्रॉडकास्टर्स और दर्शकों के लिए शेड्यूल और वेन्यू की प्लानिंग को सरल बनाना है।
सीडिंग और टीमों का चयन प्रक्रिया
आईसीसी की इस व्यवस्था के तहत यदि कोई पूर्व-निर्धारित सीडेड टीम ग्रुप स्टेज में टॉप-2 में जगह नहीं बना पाती है तो उसके स्थान पर क्वालीफाई करने वाली दूसरी टीम उसी स्लॉट में सुपर-8 के मैच खेलेगी। इसका अर्थ है कि टीम बदल सकती है लेकिन मैच का कोड और स्थान वही रहेगा। उदाहरण के तौर पर यदि ग्रुप ए से पाकिस्तान बाहर हो जाता है और अमेरिका क्वालीफाई करता है तो अमेरिका पाकिस्तान की निर्धारित सीडिंग पर आगे बढ़ेगा।
ग्रुप चरण की स्थिति
ग्रुप ए में भारत पाकिस्तान नामीबिया नीदरलैंड्स और अमेरिका के बीच कड़ी टक्कर है। ग्रुप बी में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी दिग्गज टीमों के साथ आयरलैंड ओमान और जिम्बाब्वे मौजूद हैं। ग्रुप सी में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ इटली नेपाल और स्कॉटलैंड अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं ग्रुप डी में न्यूजीलैंड दक्षिण अफ्रीका अफगानिस्तान कनाडा और यूएई को रखा गया है। क्रिकेट प्रेमी अब यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि कौन सी टीमें इस जटिल गणित को पार कर सुपर-8 में अपनी जगह पक्की करती हैं।
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