नहीं हुए शामिल: पायलट ने ऊंची उड़ान के लिए मल्लिकार्जुन की सभा छोड़ी

पायलट ने ऊंची उड़ान के लिए मल्लिकार्जुन की सभा छोड़ी
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जस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट अब कैप्टन से मेजर बनने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने दिल्ली कैंट में टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना) में कैप्टन से मेजर पद पर प्रमोशन के लिए हुई परीक्षा में भाग लिया। 

जयपुर | राजस्थान में चल रहे चुनावी घमासान के बीच कांग्रेस के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अब नई तैयारी में जुटे हुए हैं। 

जिसके चलते सचिन पायलट ने राजस्थान  में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन की सभा को भी नजरअंदाज कर दिया और उसमें शामिल होने नहीं पहुंचे।

पायलट का ध्यान सिर्फ ऊंची उड़ान पर ही रहा। 

दरअसल, राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) अब कैप्टन से मेजर बनने की कोशिश में लगे हुए हैं। 

इसके लिए उन्होंने दिल्ली कैंट में टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना) में कैप्टन से मेजर पद पर प्रमोशन के लिए हुई परीक्षा में भाग लिया। 

इस परीक्षा का रिजल्ट जल्द आएगा। इसमें सफल होने के बाद पायलट टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) में मेजर पद पर प्रमोट हो जाएंगे।

बता दें कि पायलट प्रादेशिक सेना में कैप्टन हैं। वहीं इसी दस्ते में मेजर पद के लिए उन्होंने पार्ट बी के लिए परीक्षा दी है।

पायलट ने दिल्ली कैंट में प्रमोशन परीक्षा में शामिल होने के बाद अपनी यूनिट के अफसरों से मुलाकात भी की है।

सिंतबर 2012 में ज्वाइन की थी प्रादेशिक सेना

गौरतलब है कि सचिन पायलट ने सिंतबर 2012 में प्रादेशिक सेना को ज्वाइन की थी जिसमें वह कैप्टन के रूप में पदास्थापित हुए थे। इसके बाद से वह अपने यूनिट से पूरी तरह सक्रिय है।  सचिन पायलट हर साल कुछ समय अपनी आर्मी यूनिट के लिए निकालते हैं और सिख रेजिमेंट के आयोजित कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लेते रहते हैं। 

बता दें कि सचिन पायलट के परिवार का जुड़ाव सेना से रहा है। उनके पिता दिवंगत कांग्रेसी नेता राजेश पायलट भी राजनीति में आने से पहले एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर थे। 

राजेश पायलट ने बतौर फाइटर पायलट भारत-पाक युद्ध में हिस्सा लिया था।

क्या है टेरिटोरियल आर्मी

- टेरिटोरियल आर्मी एक वॉलंटियर सर्विस होती है। 
- टेरिटोरियल आर्मी में अफसर बनने के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएट होना अनिवार्य है।
- इसमें प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा, फिजिकल और मेडीकल फिटनेस परीक्षाओं को पास करना होता है। 
- लिखित परीक्षा पास करने वाले को आर्मी की ट्रैनिंग दी जाती है। 
- अफसर बनने वालों को युद्ध में जरूरत पड़ने पर बुलाया जा सकता है। 

1962, 1965 और कारगिल युद्ध में प्रादेशिक सेना ने दिखाया था अदम्य साहस 

बता दें कि प्रादेशिक सेना युद्धक स्थिति में भारतीय सेना की सहायता के लिए बनाई गई है। 

यह सेना पैदल सेना का हिस्सा है। ऐसे में सचिन पायलट ऐसी स्थिति होने पर सैन्य अधिकारी के रूप में तुरंत रूपांतरित होकर अपनी भूमिका निभाते हुए दिखाई दे सकते हैं। 

प्रादेशिक सेना ने 1962 और 1965 की जंग में जवानों और अधिकारियों के साथ अदम्य साहस का परिचय दिया था। 

इसक आलवा 1999 में हुए करगिल युद्ध में भी प्रादेशिक सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। 

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