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नीलू की कलम से: पट्टे की पूछ

सच पूछिए तो ये पट्टे वाले प्राणी कुत्ते जैसे लगते भी नहीं। कुत्तों की अपनी एक बिरादरी है पूरी ठसकदार और खानदानी। ठसक देख...

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नीलू की कलम से: मुकातो 

मारवाड़ी बोलना गलत है तो घर,परिवार और समाज बोलता क्यों है? हिंदी बोलना ही अच्छा है तो किसीने अब तक सिखाई क्यों नहीं? पर...

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नीलू की कलम से: कीवी v/s काचरा

एक जमाना था जब 'एक अनार सौ बीमार' की कहावत चलती थी पर अब तो 'एक कीवी- दीर्घजीवी' की कहावत आने वाली है। हाल-चाल पूछने वाल...

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नीलू की कलम से: उकारड़ा

हमारे यहां इसे अकुरड़ा या अकुरड़ी कहते हैं।सामान्यतः हिंदी में इसे कचरे और गोबर का ढेर कहा जा सकता है,पर वास्तव में यह ए...

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नीलू की कलम से: वाल्मीकि समाज और राजपूताने की परम्पराएं

रावळों के साथ वाल्मीकि परिवार का संबंध व्यवसायिक न होकर व्यक्तिगत रहा है। प्रत्येक रावळे का अपना एक मेहतर होता है जो उनक...

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नीलू की कलम से: तिंवार

छोटी-छोटी डावड़ियां व सुहाग-भाग की चाहने वाली नारियों के शृंगार का त्योहार गणगौर होलिका-दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण एकम...

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नीलू की कलम से: फाग (फागणियो)

मगर गुस्सा निकालने का शिष्ट तरीका भी कोई मुरधर की मरवणियों से सीखे। अश्लील तो दूर, अशुभ भी न बोलेगी पर झुंझलाहट तो हो रह...

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नीलू की कलम से: ऋतुनां कुसुमाकरः

जिस प्रकार ब्रह्म अक्षर व अक्षय है वैसे ही ऋतुएं भी निरंतर व अंतरहित है। शतपथ में ऋतुओं को विनाश रहित कहा गया है। ऋतुएं...

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नीलू की कलम से: दिवाली की खुश्बू

थापना (प्रथम नवरात्रि) के दिन से ही घर में घी और मीठे से मिश्रित धुंए की सौरभ महकने लगती थी जो दिवाली आने का अलार्म था।श...

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नीलू की कलम से: 'कान कंवर सो बीरो मांगूं राई सी भोजाई'

मैं मन ही मन हंस दी क्योंकि मां से तर्क करने के लिए छप्पन इंच का सीना भी कम ही पड़ता है। खैर! बात आई गई हो गई लेकिन हर स...

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नीलू की कलम से: मुण्डक उपनिषद्

आचार्य अंगिरा के प्रति शौनक ऋषि का प्रश्न है-  "कस्मिन्नु भगवो विज्ञाते सर्वमिद विज्ञात भवतीति।" जिज्ञासु के प्रश्न से आ...

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