नीलू की कलम से: नया साल और स्मार्टफूड
नीलू की कलम से जड़ों से जुड़े विषयों पर मौलिक लेखन जो सीधा पाठक का जुड़ाव कराता है। नीलू अपने लेखन में शब्दों से तस्वीर...
नीलू की कलम से जड़ों से जुड़े विषयों पर मौलिक लेखन जो सीधा पाठक का जुड़ाव कराता है। नीलू अपने लेखन में शब्दों से तस्वीर...
युवक आत्मविश्वास के साथ दनदनाता हुआ गया और बातचीत करके ठरके से लौटा तो सूट-बूट वालों के चेहरे उतरे हुए थे और हिज हाईनेस...
लोग हमसे भी अपने विचार रखने को कह रहे हैं। उन्हें अपेक्षा है कि मैं 'आधुनिक मीरा' शीर्षक से बहुत बड़ा लेख लिखूंगी। 'अहो'...
चादर ओढ़े हुए स्त्री-पुरुष वैसे भी आकर्षक लगते हैं फिर बल्डी और पट्टूडे़ के तो कहने ही क्या। बल्डी में रंग और पैटर्न सी...
राबड़ी सर्वथा त्रिदोष रहित है क्योंकि वात का शमन बाजरी करती है, पित का शमन छाछ और कफ का शमन सांभरिया लूण। राबड़ी नितांत...
आंखें देख नहीं पा रहीं, आवाज़ देने पर भी दिमाग का क्रोनोमीटर उसे बता नहीं पा रहा कि यह मिथिलेश है जिसके साथ उसने दर्जनों...
सच पूछिए तो ये पट्टे वाले प्राणी कुत्ते जैसे लगते भी नहीं। कुत्तों की अपनी एक बिरादरी है पूरी ठसकदार और खानदानी। ठसक देख...
मैंने वादा किया था, मैं लिखूंगा। लगातार लिखूंगा। लिखना बचाता है, इसलिए। संजीदगी से लिखा क्या? वह कौन सा लिखा- पढ़ा है मे...
यह कवि है रवींद्र भारती। बहुत दूर रहते हुए भी जो हमारे बेहद करीब होने की प्रतीति दिलाता है- किसी खेत, किसी खलिहान, किसी...
रेल नाम जब भी आपके जेहन में आता है तो एक दनदनाती, खड़खड़ाती और पवन वेग से उड़ती मशीन जेहन में आती है पर कोटा जोधपुर (रेल...
शेड्स बहुरंगी हैं, लिहाजा विषयांतर भी संभव है क्योंकि कंठ स्वरों में फूटे किस्से एक दिन में खतम नहीं होते। यह वह इतिहास...
पहले पटना सिर्फ पटना हुआ करता था और मुद्दतों सिर्फ पटना ही रहा। दानापुर,फुलवारी, मनेर, सिटी, कुम्हरार, फतुहा, बिहटा, कुल...
उस बुलडोजर की अपनी कोई आवाज़ नहीं होती। कोई भोंपू, कोई मुनादी, कोई डुगडुगी पार्टी नहीं हुआ करती है उसके साथ। तो.. ऐसा ही...
मारवाड़ी बोलना गलत है तो घर,परिवार और समाज बोलता क्यों है? हिंदी बोलना ही अच्छा है तो किसीने अब तक सिखाई क्यों नहीं? पर...