जयपुर | Sharad Purnima 2023: शरद पूर्णिमा पर इस बार चांदनी रात में खीर नहीं रखी जा सकेगी, क्योंकि इस बार चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) का साया है।
9 साल बाद दुर्लभ संयोग: शरद पूर्णिमा की खीर पर चंद्र ग्रहण का साया, कल कितने बजे लगेगा सूतक काल
शरद पूर्णिमा पर इस बार चांदनी रात में खीर नहीं रखी जा सकेगी, क्योंकि इस बार चंद्र ग्रहण का साया है। खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की सदियों से परंपरा रही है जो इस बार नहीं निभाई जा सकेगी।
HIGHLIGHTS
- शरद पूर्णिमा पर इस बार चांदनी रात में खीर नहीं रखी जा सकेगी, क्योंकि इस बार चंद्र ग्रहण का साया है। खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की सदियों से परंपरा रही है जो इस बार नहीं निभाई जा सकेगी।
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28 अक्टूबर यानि कल शरद पूर्णिमा है और शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत बरसाता है।
शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी के साथ ही चंद्र देवता की पूजा की जाती है।
लेकिन इस बार शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण ( lunar eclipse) पड़ रहा है। 9 साल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है कि जब शरद पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण दोनों साथ हैं।
बता दें कि इससे पहले 8 अक्टूबर 2014 को शरद पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ा था।
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क्या भारत में दिखेगा चंद्रग्रहण ?
भारत में चंद्रग्रहण 28 तारीख तारीख को मध्य रात्रि 1 बजकर 5 मिनट से प्रारंभ हो रहा है। ग्रहण समाप्त होने का समय 2 बजकर 24 मिनट।
ग्रहण काल का समय 1 घंटे 18 मिनट का होगा। चंद्रग्रहण का मध्यकाल रात में 1 बजकर 44 मिनट पर रहेगा।
यानी इस समय चंद्रग्रहण का प्रभाव सबसे ज्यादा रहेगा। चंद्रग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले 4 बजकर 5 मिनट पर होगा।
9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा सूतक काल
चंद्र ग्रहण लगने से पहले 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा।
यानि 28 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के दिन दोपहर 04.12 से सूतक शुरू माना जाएगा जो ग्रहण समाप्ति पर खत्म होगा।
सूतक काल में सभी मंदिरों के पट बंद रहेंगे। सूतक काल में पूजा-पाठ, भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करना भी वर्जित बताया गया है।
खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की सदियों से परंपरा रही है जो इस बार नहीं निभाई जा सकेगी।
शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी गई खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण करने से आरोग्य की प्राप्ती होती है।
इसके साथ ही चंद्रमा के प्रतिकूल प्रभाव से मुक्ति भी मिलती है। चंद्र ग्रहण का कई राशियों पर प्रभाव पड़ेगा।
चंद्र ग्रहण भारत समेत यूरोपीय देशों, एशियन देशों, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, उत्तर व पूर्व दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक महासागर, हिन्द महासागर, अंटार्कटिका में दिखेगा।
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