Sikar: एसएफआई का 56वां स्थापना दिवस: हर्ष पर्वत से कलेक्ट्रेट तक गूंजी अरावली बचाने की हुंकार

एसएफआई का 56वां स्थापना दिवस: हर्ष पर्वत से कलेक्ट्रेट तक गूंजी अरावली बचाने की हुंकार
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Highlights

  • हर्ष पर्वत पर झंडारोहण के साथ मनाया गया एसएफआई का 56वां स्थापना दिवस।
  • नई शिक्षा नीति और निजीकरण के खिलाफ छात्र एकजुट होकर लड़ेंगे लड़ाई।
  • अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए हर्ष पर्वत से कलेक्ट्रेट तक निकाला पैदल मार्च।
  • अवैध खनन पर रोक और अरावली को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की सरकार से मांग।

सीकर | स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के शिक्षा, संघर्ष और बलिदान के 55 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संगठन का 56वां स्थापना दिवस आज ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व वाले हर्ष पर्वत पर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिला सचिव राकेश मुवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिले भर से आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और छात्र हितों की रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत जिला अध्यक्ष महिपाल सिंह गुर्जर द्वारा संगठन का झंडारोहण करके की गई। इसके पश्चात देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके पदचिन्हों पर चलने का आह्वान किया गया।

शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ लामबंदी

कार्यक्रम के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व काउंसलर अजयपाल सिंह ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने देश और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में सस्ती और सुलभ शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अजयपाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति सहित विभिन्न प्रकार के बिल लाकर शिक्षा व्यवस्था के मूल ढांचे को प्रभावित करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा का तेजी से निजीकरण करने पर तुली हुई है जिससे आने वाले समय में सार्वजनिक शिक्षण संस्थान धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने आह्वान किया कि आज स्थापना दिवस के अवसर पर सभी छात्र संकल्प लें कि वे सार्वजनिक शिक्षा को बचाने के लिए अपने संघर्ष को और अधिक तेज करेंगे।

संगठन का गौरवशाली इतिहास

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जाखड़ ने संगठन के गौरवशाली इतिहास और अब तक के संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया केवल एक छात्र संगठन नहीं है बल्कि यह हमेशा विद्यार्थियों के साथ-साथ किसानों, मजदूरों और समाज के शोषित वर्गों की आवाज बनकर खड़ा रहा है। संगठन ने हमेशा सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई लड़ी है। आने वाले समय में भी संगठन विद्यार्थियों की मूलभूत आवश्यकताओं जैसे बेहतर बुनियादी ढांचा, पुस्तकालय और सस्ती फीस को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। विद्यार्थियों को अपनी शक्ति पहचान कर लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक मांगना होगा।

अरावली संरक्षण और पर्यावरण की चुनौती

प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र ढाका ने अरावली पर्वतमाला के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि यह देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है। अरावली न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में अवैध खनन, अतिक्रमण और सरकारी उदासीनता के चलते अरावली पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। हर्ष पर्वत अरावली श्रृंखला का एक अभिन्न हिस्सा है और यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को इसके भयावह परिणाम भुगतने होंगे। संगठन ने सरकार से मांग की है कि पूरे अरावली क्षेत्र को तत्काल संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए।

हर्ष पर्वत से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च

स्थापना दिवस समारोह के समापन के बाद अरावली बचाओ और पर्यावरण बचाओ के नारों के साथ सैकड़ों छात्रों ने हर्ष पर्वत से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। इस मार्च के माध्यम से प्रशासन को यह संदेश दिया गया कि छात्र शक्ति अब पर्यावरण के मुद्दों पर भी चुप नहीं बैठेगी। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक अरावली को बचाने के लिए सरकार ठोस कदम नहीं उठाएगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस कार्यक्रम में पूर्व जिला अध्यक्ष पंकज डोगीवाल, ओमप्रकाश डूडी, बबीता बाजिया, अभिषेक महला, संदीप नेहरा, राजू बिजारणियां, सुमेर बुडानिया, सुनील गोदारा और गोपाल बागड़ी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और छात्र उपस्थित रहे।

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