Rajasthan: राजस्थान के डॉक्टर ने 50 की उम्र में उठाया 442 किलो वजन, श्रीलंका में जीते 3 गोल्ड मेडल

राजस्थान के डॉक्टर ने 50 की उम्र में उठाया 442 किलो वजन, श्रीलंका में जीते 3 गोल्ड मेडल
डॉक्टर दीपक सिंह का पावरलिफ्टिंग में कमाल
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Highlights

  • 50 साल की उम्र में डॉ. दीपक सिंह ने श्रीलंका में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग में जीते 3 गोल्ड मेडल।
  • बेंच प्रेस, स्क्वाट और डेडलिफ्ट कैटेगरी में कुल 442 किलोग्राम वजन उठाकर रचा इतिहास।
  • फिटनेस के लिए किसी स्टेरॉयड का नहीं बल्कि शुद्ध देसी घी और दूध का किया सेवन।
  • डॉ. दीपक भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल सरकारी अस्पताल में टीबी वार्ड के विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।

भरतपुर | राजस्थान के भरतपुर जिले के एक सरकारी डॉक्टर ने खेल जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। 50 साल की उम्र में जब लोग अक्सर अपनी सेहत और बढ़ती उम्र को लेकर चिंतित रहते हैं, उस उम्र में डॉ. दीपक सिंह ने वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 442 किलोग्राम वजन उठाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। हाल ही में श्रीलंका में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने तीन अलग-अलग कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। डॉ. दीपक की यह कहानी उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो उम्र को महज एक आंकड़ा मानते हैं।

भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल आरबीएम सरकारी अस्पताल में टीबी वार्ड के विभागाध्यक्ष एचओडी डॉ. दीपक सिंह अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद खेलों के प्रति अपना समर्पण बनाए हुए हैं। वह दिनभर मरीजों के इलाज में व्यस्त रहते हैं लेकिन सुबह और शाम का समय अपनी फिटनेस और ट्रेनिंग के लिए निकालते हैं। डॉ. दीपक ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ करने की इच्छा हो तो सरकारी नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियां कभी भी बाधा नहीं बनती हैं। श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग टूर्नामेंट में उन्होंने 120 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया था।

प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन और मेडल की बौछार

इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान डॉ. दीपक सिंह ने अपने प्रदर्शन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बेंच प्रेस कैटेगरी में 122 किलोग्राम, स्क्वाट में 150 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 170 किलोग्राम वजन उठाया। इस तरह कुल 442 किलोग्राम भार उठाकर उन्होंने तीन अलग-अलग कैटेगरी में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से न केवल भरतपुर बल्कि पूरे राजस्थान और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है। उनकी सफलता की गूंज आज पूरे चिकित्सा जगत और खेल प्रेमियों के बीच सुनाई दे रही है।

सेना में जाने का था सपना लेकिन बने डॉक्टर

डॉ. दीपक सिंह के पिता महेंद्र सिंह भी बच्चों के डॉक्टर रहे हैं और उनकी माता सुमन कुमारी एक गृहिणी हैं। डॉ. दीपक का शुरुआती सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान एनसीसी भी ली थी। हालांकि नियति को कुछ और ही मंजूर था और साल 1995 में उनका चयन उदयपुर मेडिकल कॉलेज में हो गया। डॉक्टर बनने के बाद भी उनके भीतर का खिलाड़ी शांत नहीं हुआ और उन्होंने मेडिकल कॉलेज के दिनों से ही खेलों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। कॉलेज लाइफ में वह एथलेटिक्स और अन्य खेलों में हमेशा आगे रहते थे।

कोरोना काल के बाद की शानदार वापसी

डॉ. दीपक सिंह ने साल 2019 में पहली बार भरतपुर में आयोजित एक टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में उन्होंने जिला और राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीता जबकि नेशनल लेवल पर उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसके बाद उनका हौसला बढ़ गया और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले पाए लेकिन उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। साल 2020 में महाराष्ट्र के अमरावती में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता। इसके बाद पारिवारिक और सरकारी जिम्मेदारियों के कारण उन्हें खेलों से करीब चार साल का ब्रेक लेना पड़ा। लेकिन एक सच्चे खिलाड़ी की तरह उन्होंने फिर से वापसी की और साल 2024 में रायपुर में आयोजित नेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी फॉर्म साबित की।

देसी डाइट और फिटनेस का असली मंत्र

आज के समय में जहां युवा बॉडी बनाने के लिए स्टेरॉयड और सिंथेटिक सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, वहीं डॉ. दीपक सिंह ने एक नई मिसाल पेश की है। उनका कहना है कि उनकी यह मस्कुलर बॉडी और ताकत पूरी तरह से देसी खानपान का परिणाम है। वह शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं और उनकी डाइट में देसी घी और दूध की प्रमुख भूमिका रहती है। उन्होंने कभी भी नॉनवेज या किसी भी प्रकार के हानिकारक स्टेरॉयड का उपयोग नहीं किया। डॉ. दीपक युवाओं को संदेश देते हैं कि फिट रहने के लिए शॉर्टकट अपनाने की जरूरत नहीं है। प्राकृतिक भोजन और नियमित मेहनत से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की बॉडी बनाई जा सकती है।

परिवार का सहयोग और बच्चों की उपलब्धियां

डॉ. दीपक सिंह का परिवार भी उपलब्धियों से भरा हुआ है। उनकी पत्नी डॉ. वत्सना कसाना भी एक सरकारी अधिकारी हैं और वर्तमान में वह एमएस गवर्नमेंट होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. वत्सना खुद भी साल 2019 में मिसेज एशिया पैसिफिक और साल 2023 में इंडिया एलीट रह चुकी हैं। वह कई विज्ञापनों में भी नजर आ चुकी हैं और अपने पति के हर फैसले में उनके साथ खड़ी रहती हैं। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उनका बड़ा बेटा आदित्य भी आर्म्स रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग में सक्रिय है और वर्तमान में नीट की तैयारी कर रहा है। उनकी बेटी जो दसवीं कक्षा में पढ़ती है, वह ताईक्वांडो में ब्लैक बेल्ट है।

भविष्य के लक्ष्य और समाज को संदेश

डॉ. दीपक सिंह अब अपनी अगली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुट गए हैं। उनका अगला लक्ष्य विश्व रिकॉर्ड बनाना है। वह बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराते हुए देखना उनके जीवन का सबसे गौरवान्वित पल था। वह कहते हैं कि एक डॉक्टर होने के नाते वह स्वास्थ्य के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं और अपने मरीजों को भी दवाइयों के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। डॉ. दीपक के अनुसार अगर हम अपनी दिनचर्या में से मात्र एक घंटा भी व्यायाम के लिए निकालें तो हम कई गंभीर बीमारियों से दूर रह सकते हैं। भरतपुर पहुंचने पर स्थानीय लोगों और खेल संगठनों ने उनका भव्य स्वागत किया है।

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