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पूर्वी राजस्थान के दस जिलों से हजारों क्षत्रियों का महासमागम संपन्न हुआ। उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल ने आर्थिक सशक्तिकरण के लिए इजराइल मॉडल अपनाने का आह्वान किया। ईडब्ल्यूएस आरक्षण को दस से बढ़ाकर बीस प्रतिशत करने की मांग उठी। बीस विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया।
खेड़ली | राजस्थान की वीर धरा पर एक बार फिर क्षत्रिय समाज ने अपनी एकजुटता और वैचारिक प्रखरता का परिचय दिया है। सामाजिक एकता मंच के तत्वावधान में अलवर जिले के खेड़ली गंज स्थित कृषि उपज मंडी मैदान में आयोजित पूर्वी राजस्थान क्षत्रिय महासमागम ने न केवल क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों को नई दिशा दी है बल्कि समाज के भविष्य के लिए एक आर्थिक और राजनीतिक ब्लूप्रिंट भी प्रस्तुत किया है। इस ऐतिहासिक महाकुंभ में पूर्वी राजस्थान के दस जिलों से हजारों की संख्या में राजपूत समाज के लोग केसरिया साफे और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। यह समागम केवल एक शक्ति प्रदर्शन नहीं था बल्कि यह समाज के भीतर व्याप्त समस्याओं के समाधान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक सामूहिक संवाद का मंच बन गया।
आर्थिक सशक्तिकरण: इतिहास से आगे बढ़ने का समय
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल ने समाज को संबोधित करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधुनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि केवल अतीत के गौरवशाली इतिहास के भरोसे रहने से समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। हमें अपने इतिहास से साहस और संस्कार लेने चाहिए लेकिन भविष्य की नींव आर्थिक मजबूती पर रखनी होगी। उन्होंने समाज को आर्थिक रूप से सशक्त होने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आर्थिक शक्ति ही वह धुरी है जिसके चारों ओर सामाजिक और राजनीतिक सम्मान घूमता है।
राजस्थान के लिए सौर ऊर्जा मॉडल और बेरोजगारी का अंत
मेघराज सिंह रॉयल ने राजस्थान की बेरोजगारी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक अभिनव आर्थिक मॉडल पेश किया। उन्होंने बताया कि राजस्थान की जो बंजर भूमि वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी है वह सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सोना उगल सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार बेरोजगार युवाओं को चार-चार एकड़ बंजर जमीन आवंटित करे और उस पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में सहयोग दे तो राजस्थान का प्रत्येक युवा न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा। यह मॉडल युवाओं को लखपति बनाने और प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की क्षमता रखता है।
इजराइल मॉडल: शून्य से शिखर तक की यात्रा
समाज को संगठित और मजबूत करने के लिए रॉयल ने इजराइल का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार यहूदियों ने अपने अस्तित्व के संकट से उबरकर दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्तियों में अपना नाम दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि इजराइल ने सबसे पहले अपनी रोटी अर्थात कृषि और बुनियादी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया। जब वे आर्थिक रूप से इतने मजबूत हो गए कि दुनिया की महाशक्तियां उन पर निर्भर होने लगीं तब उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा स्वतः ही स्थापित हो गई। उन्होंने राजपूत समाज से अपील की कि वे भी पहले आर्थिक रूप से सक्षम बनें और फिर संगठित होकर अपनी शक्ति का सदुपयोग करें।
राजनीतिक चतुरता: किंगमेकर की भूमिका
राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बात करते हुए मेघराज सिंह ने बाल ठाकरे के मॉडल का उदाहरण दिया। उन्होंने समाज को सलाह दी कि हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने की होड़ में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठाकर हो तो ठाकरे वाला काम करो अर्थात समाज को ऐसी निर्णायक शक्ति बनना चाहिए कि जो भी सत्ता में आए वह समाज के हितों का सम्मान करे। खुद चुनाव लड़ने से कई बार समाज के भीतर गुटबाजी बढ़ती है और हार की स्थिति में समाज का मनोबल गिरता है। समाज को किंग बनने के बजाय किंगमेकर की भूमिका में आना चाहिए ताकि राजनीतिक दल समाज की उपेक्षा करने का साहस न कर सकें।
सामाजिक समरसता और 36 कौम का साथ
मेघराज सिंह रॉयल ने जातिवाद को समाज के पतन का एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने एक बहुत ही व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज एक शरीर की तरह है और विभिन्न जातियां उसके अंग हैं। ऐतिहासिक रूप से राजपूत इस सामाजिक शरीर के दिल के समान थे। जब दिल ने बाकी अंगों से दूरी बना ली तो पूरा शरीर कमजोर होने लगा। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक राजपूत युवा को अन्य समाजों के कम से कम पांच लोगों को अपना भाई बनाना चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। जब हम 36 कौम को साथ लेकर चलेंगे तभी समाज की खोई हुई प्रतिष्ठा वापस आएगी।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
सरकारी नौकरियों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य निजी क्षेत्र और कौशल आधारित रोजगार का है। रेलवे पोर्ट और बिजली जैसे क्षेत्रों के निजीकरण के दौर में केवल आरक्षण के भरोसे रहना बुद्धिमानी नहीं होगी। उन्होंने कम पढ़े-लिखे युवाओं के लिए एक अप्रेंटिसशिप मॉडल की घोषणा की। इसके तहत जो बच्चे पढ़ाई में पीछे रह गए हैं उन्हें होटल और पर्यटन क्षेत्र में तीन साल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें पच्चीस हजार रुपये प्रति माह तक का स्टाइपेंड और रहने-खाने की सुविधा दी जाएगी ताकि वे तीन साल बाद दुनिया में कहीं भी सम्मानजनक रोजगार पा सकें।
शक्ति सिंह बांदीकुई: पूर्वी राजस्थान की उपेक्षा का अंत
मंच के संयोजक शक्ति सिंह बांदीकुई ने अपने संबोधन में पूर्वी राजस्थान के क्षत्रियों की उपेक्षा पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अब तक यह माना जाता था कि इस क्षेत्र में समाज संगठित नहीं है लेकिन आज की भीड़ ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वी राजस्थान के बीस से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में राजपूत मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। इन सीटों पर मतदाताओं की संख्या पंद्रह हजार से लेकर सत्तावन हजार तक है। उन्होंने धौलपुर राजाखेड़ा बाड़ी बसेड़ी बयाना सपोटरा टोडाभीम करौली लालसोट महुआ मालपुरा बामनवास मुंडावर रामगढ़ राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ बहरोड़ बानसूर थानागाजी और कठूमर जैसी सीटों का उल्लेख किया जहां समाज का प्रभाव अत्यंत गहरा है।
प्रमुख मांगें और प्रस्ताव
महासम्मेलन में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए और सरकार को ज्ञापन सौंपा गया। इनमें प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- ईडब्ल्यूएस आरक्षण की सीमा को दस प्रतिशत से बढ़ाकर बीस प्रतिशत किया जाए।
- केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस नियमों को राजस्थान मॉडल की तर्ज पर सरल करे जिसमें आठ लाख रुपये की आय सीमा के अलावा संपत्ति की जटिल शर्तों को हटाया गया है।
- पंचायत राज और शहरी निकाय चुनावों में भी ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण उम्मीदवार भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी कर सकें।
- एनसीईआरटी की पुस्तकों में इतिहास के साथ हो रही छेड़छाड़ को रोका जाए और स्थानीय राजवंशों के शौर्य को उचित स्थान दिया जाए।
- पूर्वी राजस्थान को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित हिस्सेदारी दी जाए क्योंकि इस क्षेत्र से समाज का एक भी सांसद नहीं है।
इतिहास और पर्यावरण संरक्षण
कार्यक्रम में इतिहास के संरक्षण पर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने तुंगा और खानवा के युद्धों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे इस क्षेत्र के वीरों ने विदेशी आक्रांताओं का मुकाबला किया था। मेघराज सिंह रॉयल ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने बंजर भूमि पर साढ़े सात लाख पेड़ लगाकर एक जंगल विकसित किया है। उनके इस कार्य की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई है और ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना पार्टनर चुना है।
निष्कर्ष और संकल्प
महासम्मेलन के अंत में उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे सामाजिक कुरीतियों को त्यागेंगे नशामुक्ति की दिशा में कार्य करेंगे और समाज के आर्थिक उत्थान के लिए एकजुट रहेंगे। यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा और रोजगार की क्रांति लाने का भी संकल्प लिया गया। इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस राजेंद्र सिंह शेखावत ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह शेखावत और कुमोद कंवर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन हेलीकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा के साथ हुआ जो समाज के गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक बना।
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