Highlights
- 1965 भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे भंवर सिंह शेखावत
- 61 वर्षों से पत्नी कर रही है लौटने का इंतज़ार
- आज भी सुहागन की तरह श्रृंगार करती हैं दरयाव कंवर
- 20 लांसर यूनिट में तैनात थे शहीद भंवर सिंह
जयपुर | राजस्थान के जयपुर जिले के बधाल निवासी शहीद नायब सूबेदार भंवर सिंह शेखावत की कहानी अटूट प्रेम और प्रतीक्षा की एक मिसाल है। भारतीय सेना की 20 लांसर यूनिट में तैनात भंवर सिंह 2 सितंबर 1965 को भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे।

पाकिस्तानी सेना की टोह लेने के दौरान हुए हमले में उनकी शहादत हुई, लेकिन उनकी पार्थिव देह कभी घर नहीं लौटी। पिछले 61 वर्षों से उनकी पत्नी, वीरांगना दरयाव कंवर, आज भी अपने पति के लौटने की आस लगाए बैठी हैं। परिजनों के अनुसार, दरयाव कंवर आज भी एक विवाहिता की तरह हैं और विधवा का जीवन नहीं जीतीं।
उनके मन में यह अटूट विश्वास है कि उनके पति एक दिन जीवित लौटेंगे। समाज के लिए यह केवल एक शहादत हो सकती है, लेकिन दरयाव कंवर के लिए यह जीवन भर की प्रतीक्षा और समर्पण है। उनकी यह उम्मीद ही आज उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल बनी हुई है।

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