अलविदा मुंबादेवी के शेर: भाजपा दिग्गज राज पुरोहित का निधन: राज के. पुरोहित का निधन: मुंबादेवी के शेर और भाजपा के बेबाक नेता का सफरनामा

राज के. पुरोहित का निधन: मुंबादेवी के शेर और भाजपा के बेबाक नेता का सफरनामा
भाजपा दिग्गज राज पुरोहित का निधन
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उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट जून 2015 का वह कथित स्टिंग ऑपरेशन था, जिसने दिल्ली से लेकर मुंबई तक हड़कंप मचा दिया था।

एक गुप्त वीडियो में पुरोहित अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते नजर आए थे।

उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि पार्टी में अब सामूहिक नेतृत्व नहीं बचा है और केवल नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ही चलती है।

इतना ही नहीं, उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बेचारा बताते हुए कहा था कि वे दिल्ली और स्थानीय लॉबी के दबाव में काम कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

मुंबई | भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र की राजनीति में उत्तर भारतीय चेहरा कहे जाने वाले राज के. पुरोहित का आज मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।

राज पुरोहित का जाना न केवल भाजपा के लिए बल्कि मुंबई की उस राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है, जहाँ वे राजस्थानी समाज और स्थानीय मराठी मानुस के बीच एक सेतु की तरह कार्य करते थे। उन्हें मुंबादेवी का शेर कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने उस दौर में भाजपा का परचम लहराया जब दक्षिण मुंबई कांग्रेस का अभेद्य किला मानी जाती थी। राज पुरोहित का जन्म राजस्थान के सिरोही जिले में हुआ था, लेकिन उनकी कर्मभूमि मुंबई रही। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की और धीरे-धीरे भाजपा के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शुमार हो गए।

1990 के दशक में जब मुंबई में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन अपनी जड़ें जमा रहा था, तब राज पुरोहित ने मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र को भाजपा का गढ़ बना दिया। वे यहाँ से लगातार चार बार विधायक चुने गए। 1995 की युति सरकार में उन्हें आवास और शहरी विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी, जहाँ उन्होंने मुंबई के किरायेदारों और पगड़ी सिस्टम के तहत रहने वाले लोगों के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। हालाँकि, राज पुरोहित का करियर जितना उपलब्धियों भरा रहा, उतना ही विवादों के साये में भी रहा।

उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट जून 2015 का वह कथित स्टिंग ऑपरेशन था, जिसने दिल्ली से लेकर मुंबई तक हड़कंप मचा दिया था। एक गुप्त वीडियो में पुरोहित अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते नजर आए थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि पार्टी में अब सामूहिक नेतृत्व नहीं बचा है और केवल नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ही चलती है। इतना ही नहीं, उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बेचारा बताते हुए कहा था कि वे दिल्ली और स्थानीय लॉबी के दबाव में काम कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

हालांकि उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया, लेकिन इस एक घटना ने उन्हें फडणवीस कैबिनेट में मंत्री पद की दौड़ से बाहर कर दिया। राज पुरोहित अपनी आक्रामक शैली और हार्डलाइन हिंदुत्व के लिए भी जाने जाते थे। 2017 में उन्होंने महाराष्ट्र के सभी शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम अनिवार्य करने की मांग उठाकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। उनका स्पष्ट कहना था कि भारत में रहने वालों को वंदे मातरम कहना ही होगा। इसी तरह, उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे को बोगस नेता करार दिया था, जिसके बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने उनके दफ्तर में तोड़फोड़ की थी।

इन विवादों के बावजूद, दक्षिण मुंबई की चालों में रहने वाले आम लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई। 2014 की मोदी लहर में वे कोलाबा विधानसभा सीट से जीतकर आए और उन्हें फडणवीस सरकार में मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाया गया। लेकिन 2015 के स्टिंग कांड की छाया उनके करियर पर बनी रही, जिसका परिणाम यह हुआ कि 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काटकर राहुल नार्वेकर को दे दिया।

एक कद्दावर नेता के लिए यह बड़ा झटका था, लेकिन राज पुरोहित ने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी और बगावत नहीं की। राज पुरोहित की विरासत अब उनके पुत्र आकाश राज पुरोहित संभाल रहे हैं, जो वर्तमान में भाजपा के नगरसेवक के रूप में सक्रिय हैं। राज पुरोहित का निधन मुंबई भाजपा के एक युग का अंत है।

वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने कभी समझौता नहीं किया और अपनी बात बेबाकी से रखी, चाहे उसकी कीमत उन्हें अपने राजनीतिक करियर से ही क्यों न चुकानी पड़ी हो। मुंबई का राजस्थानी समाज आज अपने सबसे बुलंद स्वर को खो चुका है।

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