Rajasthan: कोटा में गोरक्षकों ने रोका वसुंधरा राजे का काफिला: मृत गायों के निस्तारण पर जताया विरोध; हाईवे पर लगा लंबा जाम

कोटा में गोरक्षकों ने रोका वसुंधरा राजे का काफिला: मृत गायों के निस्तारण पर जताया विरोध; हाईवे पर लगा लंबा जाम
Vasundhara Raje
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Highlights

  • कोटा के हैंगिंग ब्रिज पर गोरक्षकों ने वसुंधरा राजे का काफिला करीब 20 मिनट तक रोके रखा।
  • मृत गायों को खुले में फेंकने और सड़कों पर घसीटने के विरोध में गोरक्षक प्रदर्शन कर रहे थे।
  • पूर्व मुख्यमंत्री ने मौके से ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को फोन कर सख्त निर्देश दिए।
  • प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही हाईवे पर लगा जाम खुल सका।

कोटा | कोटा के प्रसिद्ध हैंगिंग ब्रिज पर सोमवार को उस समय अफरा तफरी मच गई जब गोरक्षकों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफिले को बीच रास्ते में ही रोक लिया। यह घटना कोटा चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर दोपहर करीब एक बजे की है जब वसुंधरा राजे झालावाड़ से जयपुर की ओर जा रही थीं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर करीब बीस मिनट तक काफिले को आगे नहीं बढ़ने दिया जिससे हाईवे पर लंबा जाम लग गया। गोरक्षकों का मुख्य विरोध कोटा शहर में मृत गायों के निस्तारण की दोषपूर्ण व्यवस्था को लेकर था। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम के ठेकेदार मृत गायों के प्रति संवेदनहीनता बरत रहे हैं। उन्होंने वसुंधरा राजे को बताया कि बंदा धरमपुरा के पास खाली प्लॉटों में मृत गायों को खुले में फेंक दिया जाता है। इसके अलावा गायों को सड़कों पर घसीटकर ले जाया जाता है जिससे न केवल जीव क्रूरता होती है बल्कि हिंदू धर्म की आस्था को भी गहरी चोट पहुंचती है।

मौके पर ही अधिकारियों को दिए निर्देश

काफिला रुकने के बाद वसुंधरा राजे ने प्रदर्शनकारियों की बातों को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने देखा कि गोरक्षक और बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रशासन की अनदेखी से काफी आहत थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजे ने तुरंत अपनी गाड़ी से ही कोटा के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को फोन लगाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मृत गायों के निस्तारण की व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। राजे ने प्रशासन को यह भी कहा कि मृत गायों को खुले में फेंकने की बजाय उन्हें पूरी धार्मिक रीति-रिवाजों और सम्मान के साथ जमीन में दफनाया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन से लगातार संपर्क में रहेंगी। पूर्व मुख्यमंत्री के इस ठोस आश्वासन के बाद ही कार्यकर्ताओं ने रास्ता छोड़ा और काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति दी।

नगर निगम के खिलाफ गहरा आक्रोश

प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी नगर निगम और कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर कई बार प्रदर्शन किए जा चुके हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो भी वायरल हुए थे जिनमें गाय के मांस के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा था। इन घटनाओं ने हिंदू समाज के भीतर रोष पैदा कर दिया था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। गोरक्षकों की मांग है कि मृत पशुओं के लिए एक निश्चित और सुरक्षित स्थान तय किया जाए जहां उनका निस्तारण वैज्ञानिक और धार्मिक तरीके से हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी गायों के प्रति ऐसी क्रूरता जारी रही तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

झालावाड़ दौरे के बाद जयपुर लौट रही थीं राजे

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पिछले कुछ दिनों से अपने निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ के दौरे पर थीं। रविवार को उन्होंने झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। वहां उन्होंने मरीजों से मुलाकात की और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। अस्पताल में गंदगी और अव्यवस्था मिलने पर उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई थी। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर भी जागरूकता दिखाई थी। उन्होंने झालावाड़ में बिना हेलमेट स्कूटी चला रहे नाबालिग बच्चों को रोककर ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया था। राजे ने बच्चों से पूछा था कि हेलमेट कहां है और उन्हें सुरक्षा के महत्व के बारे में समझाया था। आज जब वह इन्हीं कार्यक्रमों के बाद जयपुर लौट रही थीं तब कोटा में उन्हें इस विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।

ट्रैफिक की स्थिति और पुलिस की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोटा चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर यातायात पूरी तरह से बाधित रहा। टोल प्लाजा से निकलते ही जैसे ही काफिला रुका पीछे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या अधिक होने के कारण वे बेबस नजर आए। वसुंधरा राजे के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद जब जाम खुला तब कहीं जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली। पुलिस अब इस मामले में शामिल प्रदर्शनकारियों और नगर निगम के ठेकेदारों की भूमिका की जांच कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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