श्रीकृष्ण का 28 दिनों तक युद्ध: सिरोही का रिछेश्वर महादेव मंदिर: जहां श्रीकृष्ण ने जामवंत से किया था 28 दिनों तक युद्ध, आज भी मौजूद है माउंट आबू तक जाने वाली रहस्यमयी गुफा

सिरोही का रिछेश्वर महादेव मंदिर: जहां श्रीकृष्ण ने जामवंत से किया था 28 दिनों तक युद्ध, आज भी मौजूद है माउंट आबू तक जाने वाली रहस्यमयी गुफा
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Highlights

  • श्रीकृष्ण पर लगा था स्यमंतक मणि चोरी का आरोप जिसे मिटाने वे रिछी पर्वत आए।
  • जामवंत के साथ 28 दिनों तक चला भीषण युद्ध, फिर हुआ जामवंती संग विवाह।
  • मंदिर के अंदर से माउंट आबू तक जाती है एक प्राचीन और रहस्यमयी गुफा।
  • स्वयंभू शिवलिंग पर आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जनेऊ का निशान।

सिरोही | राजस्थान की वीर धरा न केवल अपने शौर्य के लिए बल्कि अपनी पौराणिक मान्यताओं और देव स्थानों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। सिरोही जिले से लगभग 20 किलोमीटर दूर नादिया गांव के पास स्थित 'रिछेश्वर महादेव मंदिर' एक ऐसा ही स्थान है जो द्वापर युग की एक महत्वपूर्ण घटना का जीवंत प्रमाण माना जाता है। यह वही स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण को स्वयं पर लगे एक कलंक को धोने के लिए आना पड़ा था। रिछी पर्वत की तलहटी में स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पर्वत पर भगवान श्रीकृष्ण और रीछों के राजा जामवंत के बीच 28 दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ था।

स्यमंतक मणि और चोरी का कलंक

महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, सत्राजित नामक एक व्यक्ति के पास 'स्यमंतक मणि' थी। यह मणि अत्यंत चमत्कारी थी और कहा जाता है कि यह प्रतिदिन लगभग साढ़े बारह क्विंटल सोना प्रदान करती थी। सत्राजित भगवान श्रीकृष्ण से ईर्ष्या रखता था। एक बार जब वह मणि खो गई, तो सत्राजित ने इसका दोष भगवान श्रीकृष्ण पर मढ़ दिया और उन पर मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगाया। अपने ऊपर लगे इस कलंक को मिटाने और सत्य को सामने लाने के लिए श्रीकृष्ण मणि की खोज में निकल पड़े। खोज करते हुए वे सिरोही के इसी रिछी पर्वत तक पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि वह मणि जामवंत के पास है।

त्रेतायुग का वचन और द्वापर का युद्ध

जामवंत, जो त्रेतायुग में भगवान श्रीराम की सेना के सेनापति थे, उन्हें प्रभु श्रीराम ने एक वरदान दिया था। रावण वध के पश्चात जब जामवंत ने दोबारा युद्ध करने की इच्छा प्रकट की, तो श्रीराम ने उनसे कहा था कि द्वापर युग में उनकी यह इच्छा अवश्य पूरी होगी। जामवंत इस पर्वत पर एक युग से तपस्या कर रहे थे। इसी बीच उनकी पुत्री जामवंती को वह मणि कहीं पड़ी हुई मिली थी, जिसे उसने अपने पिता को सौंप दिया था। जब श्रीकृष्ण मणि लेने जामवंत के पास पहुंचे, तो जामवंत उन्हें पहचान नहीं पाए और दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया। यह युद्ध कोई साधारण संघर्ष नहीं था, बल्कि 28 दिनों तक चलने वाला एक महासंग्राम था।

28 दिनों का भीषण संग्राम और पहचान

लगातार 28 दिनों तक युद्ध करने के बाद जब जामवंत थकने लगे, तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि इस संसार में ऐसा कौन है जो उन्हें परास्त करने की क्षमता रखता है। तब उन्होंने अपने आराध्य प्रभु श्रीराम का स्मरण किया। जामवंत की पुकार सुनकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने वास्तविक 'राम स्वरूप' के दर्शन कराए। प्रभु को देखते ही जामवंत भाव-विभोर हो गए और उन्हें समझ आ गया कि श्रीराम ही अपना वचन निभाने के लिए श्रीकृष्ण के रूप में आए हैं। जामवंत ने तुरंत युद्ध रोक दिया और क्षमा मांगी। उन्होंने श्रीकृष्ण के सामने एक शर्त रखी कि वे मणि तभी देंगे जब श्रीकृष्ण उनकी पुत्री जामवंती से विवाह करेंगे। श्रीकृष्ण ने उनकी यह शर्त स्वीकार कर ली।

जामवंती संग विवाह और शिव का आशीर्वाद

रिछी पर्वत की तलहटी में ही एक स्तंभ के चारों ओर परिक्रमा करते हुए भगवान श्रीकृष्ण और जामवंती का विवाह संपन्न हुआ। मान्यता है कि इस विवाह के समय स्वयं भगवान शिव वहां प्रकट हुए थे और उन्होंने नवदंपति को आशीर्वाद दिया था। शिव के अंतर्ध्यान होने के बाद वहां एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे आज 'रिछेश्वर महादेव' के नाम से जाना जाता है। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस पर आज भी जनेऊ का निशान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मंदिर के पुजारी मनोहर लाल रावल बताते हैं कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं श्रीकृष्ण ने अपने हाथों से की थी।

माउंट आबू तक जाने वाली रहस्यमयी गुफा

रिछेश्वर महादेव मंदिर केवल युद्ध और विवाह की कथा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ एक अत्यंत रहस्यमयी गुफा भी है। कहा जाता है कि विवाह के पश्चात श्रीकृष्ण इसी गुफा के रास्ते माउंट आबू होते हुए द्वारका की ओर प्रस्थान कर गए थे। यह गुफा सीधे माउंट आबू तक जाती थी। पुराने समय में माउंट आबू के मंदिरों में होने वाली आरती और घंटों की आवाज इस गुफा के माध्यम से यहाँ साफ सुनाई देती थी। हालांकि, वन्यजीवों के खतरे और सुरक्षा कारणों से कुछ दशकों पहले इस गुफा के द्वार को बंद कर दिया गया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि करीब 200 साल पहले एक परिवार इस गुफा के अंदर गया था और वे 7-8 महीने बाद बाहर निकले, जबकि उन्हें लगा था कि वे केवल कुछ ही घंटों से अंदर हैं।

स्यमंतक मणि का अंतिम रहस्य

जामवंती से विवाह के बाद जब श्रीकृष्ण मणि लेकर सत्राजित के पास पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि सत्राजित की मृत्यु हो चुकी है। श्रीकृष्ण ने वह मणि सत्राजित की पत्नी को सौंपनी चाही, लेकिन उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया। श्रीकृष्ण ने कहा कि जिस मणि के कारण उन पर झूठा आरोप लगा, उसे वे अपने पास नहीं रखेंगे। अंततः उन्होंने उस मणि को अंतर्ध्यान कर दिया। आज भी लोग मानते हैं कि वह मणि इस क्षेत्र की पहाड़ियों में कहीं छिपी हो सकती है। रिछेश्वर महादेव मंदिर आज भी उन प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए पवित्र स्थान है जो यहाँ आकर सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगते हैं। यहाँ आज भी कई लोग विवाह संस्कार संपन्न करते हैं, जो इस स्थान की प्राचीन परंपरा को जीवित रखे हुए है।

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