Highlights
- वायरल वीडियो के बाद MDSU की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल।
- NSUI कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर और नकली नोट फेंककर जताया विरोध।
- नागौर के एक शिक्षक की हुई पहचान, होगी सख्त कार्रवाई।
अजमेर | राजस्थान के अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU) की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर विवादों की भेंट चढ़ गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर अपात्र छात्रों से उत्तर पुस्तिकाएं चेक करवाई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। यह मामला सामने आते ही शैक्षणिक जगत में हड़कंप मच गया है।
NSUI का जोरदार प्रदर्शन और आक्रोश
इस घटना के विरोध में छात्र संगठन NSUI ने उग्र रुख अख्तियार कर लिया है। आज NSUI के देहात अध्यक्ष अंकित घारू और शहर अध्यक्ष अभिषेक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र एमडीएसयू के मुख्य द्वार पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गेट पर चढ़कर अपना विरोध दर्ज कराया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब छात्रों ने टायर जलाकर विश्वविद्यालय के मुख्य मार्ग को जाम करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी छात्र कुलपति सचिवालय के प्रवेश द्वार तक पहुंच गए और वहां प्रतीकात्मक रूप से नकली नोट फेंककर प्रशासन पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए।
दोषी शिक्षक पर होगी सख्त कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है। परीक्षा नियंत्रक सुनील कुमार टेलर ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए नागौर शहर के एक शिक्षक की पहचान कर ली गई है, जिसकी संलिप्तता इस गंभीर लापरवाही में पाई गई है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई और दोषी को तुरंत बर्खास्त नहीं किया गया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। छात्रों का तर्क है कि मूल्यांकन में इस तरह की लापरवाही हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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