Highlights
- पाली में अहमदाबाद-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर डीएनटी समुदाय का महापड़ाव दूसरे दिन भी जारी।
- प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव व लाठीचार्ज की घटना।
- घुमंतू-विमुक्त समुदायों की 10 प्रमुख मांगों को लेकर हो रहा है प्रदर्शन।
- कई बड़े राजनेताओं ने महापड़ाव को दिया खुला समर्थन।
पाली: पाली (Pali) में डीएनटी समुदाय का अहमदाबाद-जोधपुर राजमार्ग (Ahmedabad-Jodhpur NH) पर महापड़ाव दूसरे दिन भी जारी है। पथराव-लाठीचार्ज के बाद भी हाईवे जाम है।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ और राजस्थान डीएनटी (घुमंतू, अर्ध-घुमंतू एवं विमुक्त) संघर्ष समिति की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पाली जिले के बालराई गांव के पास अहमदाबाद-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुरू हुआ महापड़ाव शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा है।
हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़क पर डटे हुए हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है।
प्रदर्शनकारियों ने हाईवे को दोनों तरफ से जाम कर रखा है, जिसके परिणामस्वरूप कीरवा से पलराई तक करीब 5 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
जिला कलेक्टर एलएन मंत्री और पुलिस अधीक्षक आदर्श सिद्धू स्वयं मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

घटनाक्रम का विवरण
शुक्रवार को स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रशासन की समझाइश के बावजूद प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं हुए।
भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया।
इस हमले के जवाब में, पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा और हाईवे को खाली कराया गया।
इसके बाद, यातायात को तत्काल हेमावास-नाडोल मार्ग से डायवर्ट किया गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई।
पणिहारी और हेमावास चौराहों पर देर रात तक वाहनों का लंबा जाम लगा रहा।
कई ट्रक-टैंकर चालक घंटों फंसे रहे और उन्हें सड़क किनारे ही रात गुजारनी पड़ी।
शनिवार सुबह भी पाली-सुमेरपुर मार्ग बंद रहा है और सभी वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से गुजारा जा रहा है।
हिंसक हुआ प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनका एक नवंबर से पाली में शांतिपूर्ण धरना चल रहा था।
गुरुवार रात को पुलिस ने उनके टेंट उखाड़ने और खाना पकाने के बर्तन जब्त करने शुरू कर दिए।
पुलिस ने आसपास के होटलों को उन्हें खाना देने से भी मना कर दिया।
इन कार्रवाइयों से भड़की भीड़ ने शुक्रवार को अहमदाबाद-जोधपुर हाईवे पर महापड़ाव डालने का निर्णय लिया।
पुलिस का पक्ष
पाली के पुलिस अधीक्षक आदर्श सिद्धू ने बताया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कई दौर की बातचीत की थी।
उन्होंने शांतिपूर्ण समझाइश का हर संभव प्रयास किया।
सिद्धू ने कहा कि इसके बावजूद, कुछ शरारती तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
हाईवे किनारे भारी पुलिस जाप्ता तैनात है और लगातार गश्त की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों की 10 प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी घुमंतू-विमुक्त समुदायों के लिए केंद्र सरकार में अलग मंत्रालय के गठन की मांग कर रहे हैं।
वे आवास के लिए जमीन के पट्टे और बच्चों की शिक्षा हेतु अलग बजट प्रावधान चाहते हैं।
पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण और डीएनटी सूची में दर्ज गड़बड़ियों का सुधार भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है।
पशुपालक समाज को सामाजिक-आर्थिक मान्यता प्रदान करना भी उनकी मांगों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
घुमंतू समुदायों के पारंपरिक पशुचारण मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराने की भी मांग की जा रही है।
बकरी पालन को कृषि का दर्जा देने और समुदाय के लोगों पर दर्ज पुराने मुकदमों को वापस लेने की भी अपील की गई है।
राजनीतिक समर्थन
राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह देवासी और लालजी देवासी के नेतृत्व में हजारों लोग सड़क पर मजबूती से डटे हुए हैं।
सोशल मीडिया पर लगातार यह अपील की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोग धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को मजबूत करें।
बाड़मेर के शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और रालोपा सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल जैसे प्रमुख राजनेताओं ने भी इस महापड़ाव का खुला समर्थन किया है।
यातायात पर असर और चेतावनी
प्रदर्शनकारी नेता लालजी देवासी ने प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तब तक धरना स्थल से नहीं हटेंगे, जब तक उनकी सभी 10 मांगें लिखित में स्वीकार नहीं कर ली जातीं।
इस महापड़ाव के कारण गुजरात, जोधपुर और जयपुर जाने वाले सैकड़ों वाहन बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
हालांकि, यात्रियों और मालवाहकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
समुदाय के लोग दावा करते हैं कि दशकों से उपेक्षित इन समुदायों की यह अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई है और पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।
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