Highlights
- डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने IAS प्रोबेशनर से संवाद किया।
- सुशासन, संवेदना और तकनीक आधारित प्रशासन पर जोर दिया गया।
- कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा पर रणनीतियाँ साझा कीं।
- प्रशिक्षु अधिकारियों को पुलिसिंग संरचना की बारीकियों से अवगत कराया गया।
जयपुर: डीजीपी राजीव कुमार शर्मा (DGP Rajiv Kumar Sharma) ने 2024 बैच के प्रोबेशनर भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों (Indian Administrative Service Officers) से संवाद किया। उन्होंने आधुनिक, उत्तरदायी और जनकेंद्रित प्रशासन का मूल मंत्र देते हुए सुशासन, संवेदना और तकनीक आधारित प्रशासन पर जोर दिया। यह नई पीढ़ी विकास और संवेदनशील प्रशासन को नई दिशा देगी।
पुलिस मुख्यालय में हुए इस संवाद सत्र में डीजीपी शर्मा ने अधिकारियों को बताया कि वर्तमान दौर तेजी से बदल रहा है, जिसके साथ नई चुनौतियाँ और समाधान भी आ रहे हैं। उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक को भविष्य के प्रशासन के तीन प्रमुख स्तंभ बताया।
डीजीपी ने कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक समन्वय, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रणनीतियाँ साझा कीं। उन्होंने जनता से प्रभावी संवाद स्थापित करने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने प्रोबेशनर अधिकारियों को सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, मजबूत नेतृत्व क्षमता और नैतिक आचरण को प्रभावी प्रशासन की अनिवार्य शर्त बताया। डीजीपी शर्मा ने जोर देकर कहा कि वे शासन व्यवस्था की नई पीढ़ी हैं, जो विकास और संवेदनशील प्रशासन को नई दिशा देंगे।

हर निर्णय में ईमानदारी, संवेदना और जनहित को सर्वोपरि रखने की सलाह दी गई। यह सुनिश्चित करेगा कि उनका प्रशासन जन-कल्याणकारी हो।
वरिष्ठ अधिकारियों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
इस अवसर पर डीआईजी सीबी दीपक भार्गव ने राजस्थान पुलिस संगठन की संरचना, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक सहयोग की प्रक्रियाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं से अधिकारियों को अवगत कराया।
आईजी एसएसबी अंशुमान भोमिया ने जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के बीच समन्वय की महत्ता समझाई। उन्होंने कानून-व्यवस्था प्रबंधन में परस्पर सहयोग की भूमिका और जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के बीच निर्बाध प्रणाली के उदाहरण साझा किए।
वहीं, आईजी कानून-व्यवस्था अनिल टांक ने राजस्थान की विशिष्ट परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। इसमें भौगोलिक चुनौतियाँ, जनजातीय क्षेत्र, सीमावर्ती जिले और राज्य की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता के संदर्भ में प्रशासनिक दृष्टिकोण शामिल था।
संवाद के दौरान प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से अपने प्रश्न पूछे। वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके सभी सवालों के समाधानात्मक उत्तर दिए, जिससे अधिकारियों को स्पष्टता मिली।

आरपीए जयपुर में मिला विशेष प्रशिक्षण
संवाद से पहले, आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आरपीए जयपुर में भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। यहाँ उन्हें प्रिवेंटिव एक्शन और निरोधात्मक कार्यवाही के बारे में बताया गया।
अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, हथियार एवं विस्फोटक संबंधी कानून और कारागार एवं बंदी प्रबंधन की समग्र जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण उनके प्रशासनिक कौशल को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण था।
इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा पुलिस अभियोजन एवं न्यायिक प्रक्रियाओं की भी गहन जानकारी प्रदान की गई। इस सत्र ने उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य की कानून-व्यवस्था की जटिलताओं और पुलिसिंग संरचना की बारीकियों को समझने में अहम भूमिका निभाई।
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