Highlights
- दिग्विजय सिंह ने आडवाणी और मोदी की पुरानी फोटो शेयर कर संघ के अनुशासन की तारीफ की।
- कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने दिग्विजय सिंह के इस पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
- हरीश चौधरी ने कहा कि विचारधारा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
- यह विवाद 1995 के गुजरात मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह की एक तस्वीर से शुरू हुआ।
भोपाल | मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है। दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुशासन की प्रशंसा करते हुए एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। इस तस्वीर में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीचे जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं। यह फोटो वर्ष 1995 में गुजरात के मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के शपथ ग्रहण समारोह की बताई जा रही है। दिग्विजय सिंह ने इस पोस्ट के माध्यम से संघ की कार्यशैली पर टिप्पणी की थी।
कांग्रेस प्रभारी की तीखी प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह के इस पोस्ट ने कांग्रेस के भीतर ही एक नई हलचल पैदा कर दी है। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी और राजस्थान के बायतू विधायक हरीश चौधरी ने इस पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से ही दिग्विजय सिंह को खरी-खोटी सुनाते हुए विचारधारा के प्रति अपनी निष्ठा और स्पष्टता की बात कही है। हरीश चौधरी का स्पष्ट मानना है कि किसी भी कांग्रेसी नेता को विरोधी विचारधारा की प्रशंसा करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाता है।
सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चा
भाजपा और आरएसएस के प्रति दिग्विजय सिंह के इस अचानक बदले रुख ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है। जहां भाजपा नेता इसे संघ के संस्कारों और सादगी की जीत बता रहे हैं वहीं कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इसे दिग्विजय सिंह का व्यक्तिगत नजरिया मान रहे हैं। हरीश चौधरी द्वारा सार्वजनिक मंच पर अपनी ही पार्टी के इतने बड़े कद के नेता को टोकना राज्य की राजनीति में आने वाले बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहा है। अब देखना यह है कि दिग्विजय सिंह इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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