Highlights
- डोटासरा ने सरकार में भ्रष्टाचार बेलगाम होने का आरोप लगाया।
- बीजेपी प्रदेश प्रभारी की नाराजगी और आंतरिक कलह पर सवाल उठाए।
- जनसुनवाई को तमाशा बताते हुए गुटबाजी का आरोप लगाया।
- शिक्षा विभाग में नो बैग डे के नए नियमों की आलोचना की।
जयपुर | राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य की वर्तमान सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। डोटासरा ने जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार का खुला तांडव हो रहा है और कोई भी काम बिना लिए-दिए नहीं हो रहा है। डोटासरा के अनुसार सरकार के मंत्री और अधिकारी जनता के कल्याण के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज राजस्थान में ऐसी स्थिति बन गई है जहां अफसर प्रोजेक्ट्स में पार्टनरशिप की मांग कर रहे हैं और विकास के नाम पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भ्रष्टाचार और अफसरों की मनमानी
डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर भ्रष्टाचार बेलगाम हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि हर मंत्री किसी भी फाइल को आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग करता है। अधिकारियों की स्थिति यह है कि वे सरकारी प्रोजेक्ट्स में राज्य के कल्याण की भावना को भूलकर पार्टनरशिप मांग रहे हैं। सोलर बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी उन्होंने बड़े घोटाले की आशंका जताई है। डोटासरा ने कहा कि सोलर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली बाहर भेजी जाएगी और इसके लिए बिछाई जाने वाली लाइनों से किसानों के खेत बर्बाद हो जाएंगे। सरकारी जमीनों को बहुत कम दामों पर निजी हाथों में सौंपा जा रहा है जो जनता के साथ बड़ा धोखा है।
बीजेपी की आंतरिक कलह पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी के संगठन के भीतर चल रही खींचतान पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी के प्रदेश प्रभारी आखिर क्यों नाराज चल रहे हैं और वे प्रदेश में क्यों नहीं आ रहे हैं। डोटासरा ने पूछा कि जब राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की बैठक हुई तो उसमें प्रदेश प्रभारी क्यों शामिल नहीं हुए। उनके अनुसार बीजेपी के भीतर सत्ता और संगठन के बीच भारी दूरियां पैदा हो गई हैं। उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की भूमिका पर भी तंज कसा और कहा कि वे केवल मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन कर रहे हैं जबकि मंत्री अपनी ही सरकार की विफलताओं को उजागर कर रहे हैं। बीजेपी के भीतर आज कोई एक दिशा तय नहीं है और हर नेता अपनी अलग राह पर चल रहा है।
जनसुनवाई को बताया महज दिखावा
बीजेपी मुख्यालय में होने वाली जनसुनवाई को डोटासरा ने एक तमाशा करार दिया। उन्होंने कहा कि वहां जनता की समस्याओं का समाधान नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की गुटबाजी देखी जाती है। मंडल अध्यक्षों को अंदर बुलाने से पहले यह जांचा जाता है कि वे वसुंधरा राजे, सतीश पूनिया या राज्यवर्धन सिंह राठौड़ में से किस गुट के हैं। पसंदीदा लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसी जनसुनवाई तो घर के सोफे पर बैठकर भी की जा सकती है। जनता आज इस अनुभवहीन सरकार से पूरी तरह तंग आ चुकी है क्योंकि मंत्रियों को सचिवालय जाने तक का समय नहीं है। कई मंत्री तो महीनों से अपने दफ्तर तक नहीं गए हैं।
शिक्षा विभाग के फैसलों की आलोचना
डोटासरा ने शिक्षा मंत्री पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा मंत्री का शिक्षा के मूल उद्देश्यों से कोई वास्ता नहीं है। कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए नो बैग डे कार्यक्रम को बदलने पर उन्होंने आपत्ति जताई। डोटासरा ने कहा कि बच्चों को स्कूलों में सत्ता पर चर्चा के नाम पर क्या सिखाया जाएगा। क्या उन्हें यह बताया जाएगा कि पर्ची से मुख्यमंत्री कैसे चुने जाते हैं या शिक्षा मंत्री किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुरानी रचनात्मक गतिविधियों को बंद कर केवल राजनीतिक एजेंडा थोप रही है। शिक्षा विभाग में सुधार के बजाय केवल पुरानी योजनाओं का नाम बदलने और राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है।
प्रशासनिक तंत्र पर सरकार का नियंत्रण नहीं
प्रशासनिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए डोटासरा ने कहा कि राज्य में ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह हावी है। अफसर मंत्रियों की बात नहीं सुनते और न ही उनके फोन उठाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में हाल ही में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया। डोटासरा ने पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों में अधिकारियों को हटाना पड़ा और नए लोग लाने पड़े। जिलों में प्रभारी मंत्रियों और कलेक्टरों के बीच होने वाले विवादों को उन्होंने सरकार की कमजोरी बताया। उन्होंने कहा कि जब कलेक्टर ही प्रभारी मंत्री की बात नहीं मानेगा तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी। डोटासरा ने अंत में फिर दोहराया कि बीजेपी को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके प्रभारी राजस्थान क्यों नहीं आ रहे हैं और पार्टी में यह नाराजगी किस वजह से है।
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