19 साल बाद 10 बहनों को मिला भाई: हरियाणा के फतेहाबाद में 19 साल बाद 10 बेटियों के बाद हुआ बेटा, पिता ने रखा दिलखुश नाम

हरियाणा के फतेहाबाद में 19 साल बाद 10 बेटियों के बाद हुआ बेटा, पिता ने रखा दिलखुश नाम
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Highlights

  • फतेहाबाद के ढाणी भोजराज गांव में 19 साल बाद बेटे का जन्म हुआ।
  • संजय और सुनीता की पहले से 10 बेटियां हैं और वे सभी स्कूल जाती हैं।
  • जींद के उचाना में निजी अस्पताल में महिला की नॉर्मल डिलीवरी हुई।
  • बेटे का नाम दिलखुश रखा गया है और मां-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

फतेहाबाद | हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां के एक दंपती को शादी के 19 साल के लंबे इंतजार के बाद बेटे की प्राप्ति हुई है।

10 बेटियों के बाद गूंजी किलकारी

फतेहाबाद के भूना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव ढाणी भोजराज के रहने वाले संजय के घर खुशियों ने दस्तक दी है। संजय और उनकी पत्नी सुनीता की शादी साल 2007 में हुई थी।

शादी के बाद से ही यह परिवार बेटे की उम्मीद कर रहा था लेकिन एक के बाद एक बेटियां पैदा होती गईं। संजय बताते हैं कि उन्होंने कभी भी बेटियों को बोझ नहीं समझा और उनका पालन पोषण बेटों की तरह किया।

अब 19 साल बाद उनके घर में 10 बहनों के बाद एक छोटा भाई आया है। इस खबर के बाद पूरे गांव और परिवार में जश्न का माहौल बना हुआ है।

नाम रखा गया दिलखुश

बेटे के जन्म के बाद पिता संजय की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि बेटे का चेहरा देखते ही उनका दिल पूरी तरह से खुश हो गया।

इसी खुशी के कारण उन्होंने अपने नवजात बेटे का नाम ही दिलखुश रख दिया है। संजय का कहना है कि यह भगवान का आशीर्वाद है कि इतने सालों बाद उनके आंगन में बेटा खेला है।

परिवार के सभी सदस्य इस नए मेहमान के आने से बहुत उत्साहित हैं। 10 बहनों को अब रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए एक भाई मिल गया है।

बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान

संजय के परिवार में बेटियों की लंबी कतार है और वे सभी को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी बेटी सरीना अब 18 साल की हो चुकी है और वह 12वीं कक्षा में पढ़ रही है।

दूसरी बेटी अमृता 11वीं कक्षा की छात्रा है और तीसरी बेटी सुशीला सातवीं कक्षा में पढ़ती है। संजय बताते हैं कि उनकी सभी बेटियां पढ़ाई में काफी होशियार हैं।

चौथी बेटी किरण छठी कक्षा में है और पांचवीं बेटी दिव्या पांचवीं कक्षा में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है। मन्नत तीसरी कक्षा में और कृतिका दूसरी कक्षा में पढ़ती है।

आठवीं बेटी अमनीश पहली कक्षा में है जबकि नौवीं बेटी लक्ष्मी और दसवीं बेटी वैशाली अभी बहुत छोटी हैं। संजय का कहना है कि वे अपने बेटे के साथ-साथ सभी बेटियों को भी खूब पढ़ाएंगे।

जींद के उचाना में हुई डिलीवरी

इस डिलीवरी के लिए परिवार को अपने गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर जींद जिले के उचाना जाना पड़ा। वहां एक निजी अस्पताल में सुनीता को भर्ती करवाया गया था।

संजय ने बताया कि उचाना में उनके रिश्तेदार रहते हैं जिन्होंने उन्हें इस अस्पताल के बारे में जानकारी दी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने इस मामले को बहुत ही संजीदगी से लिया।

डॉक्टरों ने पेश की मानवता की मिसाल

उचाना के निजी अस्पताल के डॉक्टर नरवीर और डॉक्टर संतोष ने बताया कि जब महिला को लाया गया तो स्थिति काफी गंभीर थी। सुनीता के शरीर में मात्र 5 ग्राम खून बचा था और बच्चे के पास पानी की कमी थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने खुद के खर्च पर जींद से इमरजेंसी में खून मंगवाया। डॉक्टरों ने बताया कि यह महिला की 11वीं डिलीवरी थी इसलिए काफी जोखिम बना हुआ था।

नॉर्मल डिलीवरी से हुआ जन्म

इतनी जटिलताओं के बावजूद डॉक्टरों ने हार नहीं मानी और नॉर्मल डिलीवरी करवाने का फैसला किया। डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और सुनीता ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।

डॉक्टरों का कहना है कि 11वीं बार मां बनने के कारण सुनीता की बच्चेदानी काफी कमजोर हो चुकी थी। हालांकि सही समय पर इलाज मिलने से मां और बच्चा दोनों की जान सुरक्षित बच गई।

मां सुनीता ने जताया आभार

नवजात बच्चे की मां सुनीता अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ का दिल से धन्यवाद किया है।

सुनीता का कहना है कि उन्हें अस्पताल में किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। डॉक्टरों ने उनके साथ एक परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार किया और उनकी जान बचाई।

गांव में खुशी का माहौल

जैसे ही संजय अपने बेटे दिलखुश को लेकर गांव ढाणी भोजराज पहुंचे तो वहां बधाई देने वालों का तांता लग गया। ग्रामीणों का कहना है कि संजय एक मेहनती व्यक्ति हैं और भगवान ने उनकी सुन ली है।

संजय का परिवार अब अपने बेटे के भविष्य को लेकर सुनहरे सपने देख रहा है। वे चाहते हैं कि दिलखुश बड़ा होकर परिवार और गांव का नाम रोशन करे।

यह कहानी समाज में एक सकारात्मक संदेश भी देती है कि बेटियों को प्यार देने वाले परिवारों पर भगवान की कृपा बनी रहती है। संजय ने साबित किया है कि धैर्य और विश्वास से हर मनोकामना पूरी होती है।

आर्थिक चुनौतियों के बीच परवरिश

संजय एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनके पास आय के सीमित साधन हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी 10 बेटियों की परवरिश में कभी कोई कमी नहीं आने दी।

वे कहते हैं कि बच्चों का पेट पालने के लिए वे दिन-रात मेहनत करते हैं। अब बेटे के आने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है जिसे वे खुशी-खुशी निभाने को तैयार हैं।

अस्पताल से मिली छुट्टी

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मां और बच्चे का स्वास्थ्य अब पूरी तरह ठीक है। सभी मेडिकल पैरामीटर सामान्य होने के बाद ही उन्हें डिस्चार्ज किया गया है।

डॉक्टर नरवीर ने कहा कि ऐसे मामलों में सावधानी बरतना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने इस सफल डिलीवरी को अपनी टीम की बड़ी उपलब्धि बताया है।

संजय के मामा के लड़के इंद्रराज ने भी इस दौरान परिवार की काफी मदद की। उन्होंने ही संजय को उचाना आकर इलाज करवाने की सलाह दी थी जो सही साबित हुई।

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