Highlights
- राज्यमंत्री ओटाराम देवासी के विरुद्ध टिप्पणी पर तेजराज सोलंकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज।
- भाजपा ने अनुशासनहीनता के चलते तेजराज सोलंकी को प्रवासी प्रकोष्ठ के पद से हटाया।
- देवासी समाज ने सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार को लेकर एसपी को सौंपा था ज्ञापन।
- पुलिस ने सदर थाने में मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां उस समय तेज हो गई जब राज्यमंत्री और देवासी समाज के सम्मानित धर्मगुरु ओटाराम देवासी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वक्तव्य देने का मामला सामने आया। इस पूरे प्रकरण में देवासी समाज के लोगों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया और पुलिस प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की। समाज की ओर से जिला पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत परिवाद सौंपा गया था जिसमें आरोपी द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार की जानकारी दी गई थी। इस शिकायत के आधार पर सिरोही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भाजपा प्रवासी प्रकोष्ठ के सहसंयोजक रहे तेजराज सोलंकी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह कानूनी कार्रवाई सदर थाना क्षेत्र में संपन्न हुई है जहाँ पुलिस अब मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया
सदर थानाधिकारी घनश्याम सिंह ने इस महत्वपूर्ण मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को प्राप्त हुए परिवाद के आधार पर सिरोही निवासी तेजराज सोलंकी के विरुद्ध मामला पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत यह कार्रवाई की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो और साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। जांच टीम इस बात की पुष्टि कर रही है कि किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से इस प्रकार के आपत्तिजनक बयान जारी किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। आने वाले दिनों में आरोपी से पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है ताकि मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
देवासी समाज की भावनाएं और शिकायत के मुख्य बिंदु
प्राप्त जानकारी के अनुसार देवासी समाज के प्रतिनिधियों ने सिरोही पुलिस अधीक्षक को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट किया कि राज्यमंत्री ओटाराम देवासी केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं हैं बल्कि वे रेबारी समाज के प्रमुख धर्मगुरु भी हैं। समाज में उनकी गहरी आस्था है और वे मुंडारा स्थित सुभद्रा माता मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि तेजराज सोलंकी ने फेसबुक और वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लाइव प्रसारण कर धर्मगुरु देवासी और उनके पुत्र विक्रम देवासी के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक और झूठे आरोप लगाए हैं। समाज का कहना है कि इन वीडियो के माध्यम से गलत जानकारी फैलाई जा रही है जिससे न केवल मंत्री की छवि को नुकसान पहुंचा है बल्कि पूरे समाज की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को भी ठेस पहुंची है।
समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन से यह भी मांग की है कि आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स को तत्काल प्रभाव से बंद करवाया जाए ताकि वह भविष्य में इस तरह की भ्रामक सामग्री प्रसारित न कर सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में सख्त कानूनी कदम नहीं उठाए गए तो समाज में असंतोष की भावना और अधिक बढ़ सकती है। शिकायतकर्ताओं ने उन सभी डिजिटल साक्ष्यों को भी पुलिस को सौंपा है जिनमें सोलंकी द्वारा किए गए दावों और बयानों की रिकॉर्डिंग मौजूद है। समाज का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है और किसी भी व्यक्ति को किसी की धार्मिक आस्था पर प्रहार करने का अधिकार नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी का कड़ा रुख और पदमुक्ति
इस पूरे विवाद का असर राजनीतिक गलियारों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। अनुशासन को अपनी प्राथमिकता मानने वाली भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसी कड़ी में भाजपा प्रवासी प्रकोष्ठ राजस्थान के संयोजक श्रीकुमार लखोटिया ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए तेजराज सोलंकी को उनके पद से मुक्त कर दिया है। सोलंकी भाजपा प्रवासी प्रकोष्ठ में राजस्थान-चेन्नई के सहसंयोजक के रूप में कार्यरत थे। पार्टी नेतृत्व ने उनके बयानों को पार्टी की गरिमा और अनुशासन के पूर्णतः विपरीत माना है। भाजपा के इस फैसले से यह संदेश गया है कि संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा चाहे वह पदाधिकारी कितना भी सक्रिय क्यों न हो।
पार्टी की गरिमा और अनुशासन का महत्व
श्रीकुमार लखोटिया द्वारा जारी किए गए पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि तेजराज सोलंकी ने पार्टी की नीतियों के विरुद्ध जाकर सार्वजनिक रूप से वीडियो जारी किए। इन वीडियो में दिए गए वक्तव्य पार्टी की आचार संहिता के प्रतिकूल पाए गए हैं। भाजपा संगठन का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की बयानबाजी से पार्टी की छवि धूमिल होती है और कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाता है। पार्टी ने सोलंकी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है और उनके द्वारा किए गए कृत्यों की कड़ी निंदा की है। इस कार्रवाई के बाद भाजपा के अन्य पदाधिकारियों में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की गतिविधि करते समय संगठन की मर्यादा का ध्यान रखना अनिवार्य है।
भाजपा राजस्थान ने इस मामले में कड़ा संदेश देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्यमंत्री के विरुद्ध इस तरह की टिप्पणी करना किसी भी कार्यकर्ता के लिए भारी पड़ सकता है। अनुशासन समिति और प्रवासी प्रकोष्ठ के वरिष्ठ नेताओं ने इस निर्णय को संगठन के हित में बताया है। तेजराज सोलंकी जो चेन्नई में प्रवासी राजस्थानी समुदाय के बीच पार्टी का काम देख रहे थे अब संगठन की मुख्य धारा से बाहर कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो सोशल मीडिया का उपयोग निजी रंजिश या भ्रामक प्रचार के लिए करते हैं।
सिरोही में घटित इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युग में सोशल मीडिया पर की गई एक गलती किसी के राजनीतिक करियर को समाप्त कर सकती है और कानूनी पचड़ों में फंसा सकती है। जहां एक ओर पुलिस अपनी जांच में जुटी है वहीं दूसरी ओर देवासी समाज इस मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। राज्यमंत्री ओटाराम देवासी के समर्थकों ने पार्टी के निर्णय का स्वागत किया है और पुलिस से मामले में त्वरित चार्जशीट दाखिल करने का अनुरोध किया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजराज सोलंकी इस कानूनी और राजनीतिक संकट से कैसे बाहर निकलते हैं और पुलिस की जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
राजनीति