बेगूसराय: बेगूसराय में  बड़ा मुद्दा  गिरिराज सिंह का 'गिरवी गमछा' 

बेगूसराय में  बड़ा मुद्दा  गिरिराज सिंह का 'गिरवी गमछा' 
BJP के निर्वतमान सांसद गिरिराज सिंह
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Highlights

लोकसभा चुनाव में बेगूसराय में मुख्य मुक़ाबला BJP के गिरिराज सिंह और CPI उम्मीदवार अवधेश राय के बीच है 

स्थानीय लोग साल 2002 से यहाँ पुल बनाने की मांग कर रहे 

लोग नाव के सहारे नदी पार करके ही चेरिया बरियारपुर ब्लॉक पहुँचते है 

बेगूसराय | 2019 लोकसभा चुनाव में बिहार में बेगूसराय की लड़ाई राष्ट्रीय स्तर पर सुर्ख़ियों में थी | उस समय यहाँ मुख्य लड़ाई BJP के निर्वतमान सांसद(Outgoing MP) गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार के बीच थी | कन्हैया कुमार उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) में थे | बाद में कन्हैया कुमार कांग्रेस(INC) में शामिल हो गए | इस बार वे उत्तर पूर्व दिल्ली से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं | इस लोकसभा चुनाव में बेगूसराय में मुख्य मुक़ाबला BJP के गिरिराज सिंह और CPI उम्मीदवार अवधेश राय के बीच है |
प्रभावशाली है कि इस साल 2019 की लड़ाई में कन्हैया के लिए देश भर से प्रचारक आए थे और कन्हैया बहुत मज़बूत उम्मीदवार लगते थे | लेकिन गिरिराज सिंह ने उन्हें चार लाख से अधिक वोट से हराया था |  2024 में ये सीट राष्ट्रीय स्तर पर उतनी सुर्ख़ियों में नहीं है | लेकिन CPI भी इस चुनाव में ज़ोर-शोर से उतरी है | बेगूसराय में गिरिराज सिंह के घर के ठीक सामने एक किराना दुकान के मालिक कहते हैं, "अबकी बार की लड़ाई 50-50 की है, कुछ कहा नहीं जा सकता | जो भी जीतेगा, उसकी जीत कम अंतर से ही होगी |"
'गिरवी गमछा' गिरिराज सिंह का 

चेरिया गाँव बूढ़ी गंडक नदी

बेगूसराय लोकसभा चुनाव(Lok Sabha Elections) पर बात शुरू करने से पहले, बात चेरिया गाँव की | चेरिया, बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र का एक गाँव है | दस हज़ार की आबादी और 2,200 वोटर वाला ये गाँव आजकल 'गिरिराज के गिरवी गमछे' वाले गाँव के तौर पर मशहूर हो गया है | असल में चेरिया गाँव बूढ़ी गंडक नदी के पास बसा है | स्थानीय लोग साल 2002 से यहाँ पुल बनाने की मांग कर रहे है | इसको लेकर 24 करोड़ रुपये का डीपीआर(DPR) भी बिहार सरकार ने साल 2014 में बनाया था | लेकिन पुल आज तक नहीं बना | साल 2019 में गिरिराज सिंह अपना चुनाव प्रचार करने यहाँ आए थे |
गाँव के कुशेश्वर पासवान बताते है, " गिरिराज सिंह को सम्मान में हमने गमछा पहनाया था | जिसे उन्होंने वापस करते हुए कहा था कि इसे रख लीजिए | जब पुल बन जाएगा तो वापस ले जाएँगे | लेकिन कुछ नहीं हुआ |" चेरिया गाँव ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव(assembly elections) में वोट का बहिष्कार किया था और अबकी बार भी गाँव वाले वोट के बहिष्कार का मन बना रहे है | गाँव के जितेंद्र राय कहते हैं, "किसी को वोट देना ही नहीं है | सबका बहिष्कार है | मुखिया चुनाव हो, विधानसभा हो, लोकसभा हो | जब हमको टापू पर डाल दिया तो हम क्यों किसी को वोट करें |"
गाँव के लोग समस्याओं से परेशान

चेरिया गाँव भगवानपुर ब्लॉक(Block) में पड़ता है, लेकिन नदी पार करके जो पहला हिस्सा संपर्क में आता है, वो चेरिया बरियारपुर ब्लॉक है | लोग नाव के सहारे नदी पार करके ही चेरिया बरियारपुर ब्लॉक पहुँचते है | जहाँ से वो स्कूल, अस्पताल जैसी आधारभूत जरूरतों के लिए उन्हें जाना पड़ता है | शशिभूषण शर्मा से जब हम मिले, तो वो अपनी बेटी को स्कूल से नाव(boat) से वापस ला रहे थे |
वो कहते हैं, "बहुत दिक़्क़्त है | डर लगता है रोज़ नाव(boat) से लाने-ले जाने में | लेकिन पढ़ाई भी तो ज़रूरी है | सावन में तो नदी में पानी बहुत बढ़ जाता है तो भी बच्ची स्कूल जाती है क्योंकि 75प्रतिशत उपस्थिति (attendance) ज़रूरी है | चेरिया गाँव में सिर्फ़ आठवीं कक्षा तक सरकारी स्कूल है और गाँव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र(Primary Health Centre) तक नहीं है | गाँव की आशा सहायिका कहती हैं, "जब कोई  आपात स्थिति(emergency case) पड़ता है तो नाव(boat) से पारकर ले जाना पड़ता है | बहुत दिक़्क़त है, लेकिन नेता सुनते ही नहीं हैं | 
दिलचस्प बात ये है कि चेरिया बहुत समृद्ध(Prosperous) गाँव है और इलाक़े में 'मिनी कलकत्ता' के तौर पर मशहूर है | क्योंकि आसपास के गाँव के लोग नदी पार करके चेरिया के लोगों के गाँव में खेत मज़दूरी करने आते है | गाँव के नौजवान विदेशों में कमाने जाते है और कम से कम 11 परिवार अमेरिका में बसे हुए हैं | अभिषेक कुमार मेहता दुबई के एक सेवेन स्टार होटल(Seven Star Hotel) में काम करते हैं | लेकिन अभी तक उनकी शादी नहीं हो पाई | 

अभिषेक कुमार मेहता-'गाँव में पुल न देखकर शादी का रिश्ता लाने वाला भाग जाता है'

अभिषेक कहते हैं, "लव मैरिज(love marriage) के लिए पापा मानते नहीं और गाँव में पुल न देखकर अगुआ (शादी का रिश्ता लाने वाला) भाग जाता है |" गाँव के नौजवान आलोक बताते हैं, "वोट बहिष्कार की बात सुनकर गिरिराज सिंह 10 दिन पहले आए थे | उन्होने माफ़ी मांग ली और हमने उनका गमछा उन्हें दे दिया | लेकिन वोट देंगें या नहीं, ये तय नहीं हुआ है | मोदी जी चंद्रयान भेज रहे हैं और हम अपनी एक बुनियादी(basic) ज़रूरत पुल भी नहीं मांगें | 
 गिरिराज सिंह से पूछा, तो उन्होंने कहा, "बहुत जगह पुल बने हैं, बहुत जगह नहीं भी बने हैं |  मेरी कोशिश रहेगी कि चेरिया में पुल बन जाए |" 
स्थानीय पत्रकार घनश्याम देव कहते हैं, "पुल का मुद्दा इस इलाक़े में इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि गिरिराज सिंह को नितिन गडकरी की सभा करानी पड़ी है, ताकि पुल निर्माण को लेकर लोगों का नाराज़गी कम हो |"
बेगूसराय लोकसभा का चुनाव प्रचार देखें, तो गिरिराज सिंह को इस बार विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है  | उनके विरोध को लेकर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें से कुछ BJP समर्थकों की ओर से भी किए जा रहे हैं | गिरिराज सिंह कहते हैं कि उनके ख़िलाफ़ 'एंटी इन्कम्बेंसी क्रिएट' की जा रही है | वो कहते हैं कि वे 200 प्रतिशत जीतेंगें, लेकिन जीत का अंतर(margin) क्या पिछली बार की तरह होगा, इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हैं |
उनके प्रतिद्वंद्वी अवधेश राय 72 साल के हैं और बेगूसराय की बछवाड़ा विधानसभा(Assembly) से तीन बार विधायक रहे हैं | "एंटी इन्कम्बेंसी तो है ही | लेकिन उनकी भाषा (गिरिराज) की असभ्यता के चलते जेडीयू(JDU) और BJPकी मानसिकता वाला मतदाता भी हमारी तरफ़ आ रहा है | बेगूसराय की संस्कृति में अशिष्टता का कोई स्थान नहीं है | फ़िलहाल हम अभी यहीं कह सकते है कि जीत का अंतर(margin) पलटने वाला है |
स्थानीय पत्रकार भी इस बात को मानते है कि गिरीराज सिंह की राह आसान नहीं है | समाचार पत्र दैनिक भास्कर के बेगूसराय के ब्यूरो चीफ(Bureau chief) कुमार भवेश कहते हैं, "इस बार की लड़ाई मुश्किल है | गिरिराज सिंह जीतते भी हैं, तो उनकी जीत का अंतर(margin) एक लाख से कम हो जाएगा | इंडिया ब्लॉक(India Block) अवधेश राय के साथ दृढ़ता से खड़ा दिखता है लेकिन गिरिराज सिंह के कैंप में बिखराव है |"
दरअसल बेगूसराय में जेडीयू(JDU) और BJP के समर्थक ही गिरिराज का विरोध करते नज़र आ रहे हैं | इसी साल मार्च में गिरिराज सिंह को स्थानीय नेता विनोद राय के नेतृत्व में BJP समर्थकों ने ही काला झंडा दिखाया था, जिसका वीडियो वॉयरल(video viral) हुआ था | ये सभी सांसद की ओर से गोद लिए गए आदर्श ग्राम में किसी तरह का काम नहीं किए जाने से नाराज़ थे | इसी तरह तीन बार मटिहानी से विधायक रहे जेडीयू(JDU) के नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ़ बोगो सिंह ख़ुद को 'नीतीश का लठैत' कहते हैं, लेकिन वो खुलेआम गिरिराज सिंह के ख़िलाफ़ और अवधेश राय के पक्ष में प्रचार कर रहे है |
बोगो सिंह स्थानीय मीडिया में ये बयान दे रहे है कि गिरिराज सिंह 'हिंदू-मुसलमान में विभाजन' करते हैं, जो बेगूसराय के ख़िलाफ़ है | उन्होंने कहा, "जब कांग्रेस हिंदुओं के साथ दोहरी नीति अपनाएगी, सनातनी हिंदू को समाप्त करने की कोशिश करेगी तो गिरिराज जैसे लोग चुप नहीं बैठेंगे |"

क्या कुछ अलग है 2019 के चुनाव से

बेगूसराय लोकसभा में क्या 2019 से कुछ अलग होने वाला है | तब जबकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियाँ इस बार भी बीजेपी(BJP) और सीपीआई(CPI) हैं | साथ ही साल 2024 में साल 2019 के मुक़ाबले समाज ज़्यादा पोलराइज्ड(polarized) नज़र आता है | बीते चुनाव में चार लाख से ज़्यादा वोट से हार चुकी सीपीआई(CPI) अपनी ओर से हरसंभव कोशिश कर रही है | उम्मीदवार अवधेश राय कहते हैं, "बेगूसराय की जनता सेक्यूलर(secular) विचारों की धरती है | पिछली बार हम चुनाव हारे क्योंकि भारत भर से प्रचारक आ गए थे और हमारे स्थानीय कार्यकर्ता (कॉमरेड) पीछे चले गए थे | लोग भ्रमित(Confuse) हो गए थे |

उम्मीदवार अवधेश राय

कन्हैया का बेगूसराय से कोई ताल्लुक तो था नहीं, वो सब दिन जेएनयू(JNU) रहा | लेकिन इस बार चुनाव स्थानीय कॉमरेड लड़ रहे है | लेकिन अवधेश राय की आशा से इतर गिरिराज सिंह मानते है कि 2024 का चुनाव 'कम्युनिस्टों का दफ़न' करने वाला साबित होगा | वो कहते हैं, "बेगूसराय अपनी महिलाओं की सूनी मांगे नहीं भूलेगा जो इन समाजवादी(communists) के चलते हुआ | किसान मजदूरों का जीवन इन्हीं समाजवादी(communists) के चलते बर्बाद हो गया |
बिहार का लेनिनग्राद(leningrad)-बेगूसराय

बिहार के बेगूसराय में सीपीआई(CPI) की मज़बूत स्थिति के चलते इसे बिहार का लेनिनग्राद भी कहा जाता है | विधानसभा में सीपीआई(CPI) के दो विधायक बेगूसराय ज़िले के दो विधानसभा क्षेत्र तेघड़ा और बखरी से ही आते हैं | कृषि प्रधान(Agriculture dominated) बेगूसराय में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं | चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बेगूसराय और बखरी | 
साल 2014 में यहाँ से BJP के भोला सिंह जीते थे | साल 2019 में यहाँ लड़ाई त्रिकोणीय थी | राजद ने यहाँ से तनवीर हसन को उम्मीदवार बनाया था | उस वक़्त कन्हैया दूसरे नंबर पर और तनवीर हसन 2 लाख 68 हज़ार वोट लाकर तीसरे नंबर पर थे | गिरिराज सिंह ने कन्हैया को 4 लाख 20 हज़ार के बड़े अंतर(Margin) से हराया था |

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