अगला सीएम कौन: राजस्थान में सीएम फेस को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा ने कह दी मन की बात, मैं मुख्यमंत्री की रेस में नहीं, लेकिन...

राजस्थान में सीएम फेस को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा ने कह दी मन की बात, मैं मुख्यमंत्री की रेस में नहीं, लेकिन...
Govind Singh Dotasara
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) का भी मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने ये भी कहा कि निर्दलीय और अन्य दल भी पहले की तरह फिर से कांग्रेस के साथ होंगे। 

जयपुर | राजस्थान में अभी विधानसभा चुनाव 2023 (Rajasthan Chunav 2023) का परिणाम घोषित भी नहीं हुआ है और किसी भी दल को बहुमत की बात क्लियर नहीं हुई है।

लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता अपनी-अपनी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की बात कहते दिख रहे हैं। 

इसी के साथ राजस्थान के आगामी मुख्यमंत्री को लेकर भी घोषणाएं कर रहे हैं। 

इसी बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) का भी मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। 

आपको बता दें कि राजस्थान समेत सभी पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। आज तेलंगाना में वोटिंग जारी है जो शाम को समाप्त हो जाएगी। 

क्या कहा डोटासरा ने ?

प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा राजस्थान में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने को लेकर आश्वस्त है। उनका कहना है कि इस मामले में भाजपा काफी दूर है। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले 10 गारंटियां महंगाई राहत कैंप के द्वारा और फिर सात गारंटियां के माध्यम से जनता से आगे जो वादा किया गया। जनता ने उस पर विश्वास जताते हुए वोट किया गया है। इस बार सरकार रिपीट होने जा रही है। राजस्थान में कांग्रेस लौट रही है। 

इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि निर्दलीय और अन्य दल भी पहले की तरह फिर से कांग्रेस के साथ होंगे। 

कहा- मैं मुख्यमंत्री की रेस में नहीं, लेकिन...

गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री की रेस में नहीं हूं।  मुख्यमंत्री विधायक दल की बैठक के अनुसार तय होगा, जो पार्टी आलाकमान ही तय करेंगे। 

भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि उनके तो सात-आठ नेता मुख्यमंत्री की रेस में है, क्या वे सीएम बन जाएंगे।

भाजपा में तो आपसी विश्वास की खाई बहुत गहरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव कांग्रेस ने विकास के मुद्दों के आधार सामाजिक सुरक्षा की गारंटी से लड़ा, वहीं भाजपा का धार्मिक ध्रुवीकरण प्रमुख एजेंडा था।

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