Highlights
- मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और सूर्य पूजा का विशेष महत्व है।
- काले तिल का दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
- खिचड़ी के दान से कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।
- कंबल दान करने से शनि और राहु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गंगा स्नान और दान का बहुत ही खास महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर भगवान सूर्य की विशेष उपासना करते हैं।
सूर्य देव की उपासना का विधान
मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पित करना चाहिए। जल अर्पित करते समय उसमें काला तिल मिलाना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए दान और पुण्य से साधक को सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना फल प्राप्त होता है। इसी कारण लोग इस दिन बढ़-चढ़कर दान करते हैं।
तिल और खिचड़ी का दान
मकर संक्रांति के अवसर पर काले तिल का दान करना सबसे उत्तम माना गया है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
इस शुभ दिन पर काली उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर दान करने की भी प्राचीन परंपरा है। खिचड़ी का दान करने से जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति काफी मजबूत होती है।
खिचड़ी दान करने से न केवल ग्रहों के दोष शांत होते हैं बल्कि व्यक्ति को आरोग्य की भी प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी का सेवन करना भी स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
कंबल और रेवड़ी का महत्व
शीत ऋतु में मकर संक्रांति के दिन काले कंबल का दान करना बहुत ही कल्याणकारी सिद्ध होता है। गर्म कंबल का दान करने से शनि और राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं।
इस पर्व पर रेवड़ी और मूंगफली का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। रेवड़ी का दान करने से कुंडली में मंगल और सूर्य की स्थिति में सुधार आता है।
इन चीजों के दान से साधक के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मकर संक्रांति का यह पर्व सुख और समृद्धि लेकर आता है।
मान्यता है कि इस दिन गुड़ और घी का दान करने से भी मान सम्मान में बढ़ोतरी होती है। धर्म ग्रंथों में मकर संक्रांति को देवताओं का दिन कहा गया है।
इस दिन किया गया छोटा सा दान भी अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है। सभी भक्तों को श्रद्धा भाव से अपनी क्षमतानुसार दान अवश्य करना चाहिए।
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