शिवगंज। पंचायत समिति शिवगंज की ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत साफ-सफाई कार्यों के टेंडर की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यह खुलासा पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की शिकायत पर गठित जांच दल की रिपोर्ट में हुआ है। जांच टीम ने अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव (द्वितीय) ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, जयपुर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
Sirohi Rajasthan: पंचायत समिति शिवगंज में सफाई टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की शिकायत पर हुई जांच में खुलासा
HIGHLIGHTS
- पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की शिकायत पर हुई जांच में खुलासा
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लोढ़ा ने लगाए थे गंभीर आरोप
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि पंचायत समिति शिवगंज की 26 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 3–4 में ही ऑनलाइन टेंडर किए गए, जबकि अधिकांश ग्राम पंचायतों में ठेकेदारों से मिलीभगत कर ऑफलाइन टेंडर करवाए गए।
लोढ़ा का कहना था कि टेंडर आमंत्रित करने से पहले आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियां जारी नहीं की गईं। इन्हें टेंडर खोलने के बाद जारी किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पंचायत समिति स्तर पर सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी को उपापन समिति का सदस्य बनाया जाना अनिवार्य था, लेकिन उनसे हस्ताक्षर ही नहीं करवाए गए। इसके अलावा फरवरी माह में ग्राम पंचायतों को साफ-सफाई से संबंधित चार रजिस्टर उपलब्ध करवाए गए, किंतु ग्राम विकास अधिकारियों से जनवरी से ही उनका संधारण करने का दबाव बनाया गया।
जांच रिपोर्ट में मिली अनियमितताएं
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जांच अधिकारी—जिला परिषद जालौर के वरिष्ठ लेखाधिकारी दिनेश सारण, अधिशाषी अभियंता कुलवंत कालमा और सहायक लेखाधिकारी गोरधनलाल—ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि:
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पंचायत समिति स्तर से ग्राम पंचायतवार निविदाएं राज्य लोक उपापन पोर्टल पर अपलोड कर युबीएन नंबर प्राप्त किए गए, जबकि यह कार्य ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच की अध्यक्षता में होना चाहिए था।
बोली प्रतिभूति, प्रपत्र शुल्क एवं प्रोसेसिंग फीस पंचायत समिति स्तर पर ली जानी थी, लेकिन इन्हें ग्राम पंचायतों के नाम से प्राप्त किया गया।
निविदा खोलने, दर अनुमोदन एवं अनुबंध की प्रक्रिया पंचायत समिति स्तर से की जानी चाहिए थी, लेकिन इन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर संपादित किया गया।
रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि पूरे प्रकरण में प्रक्रियागत त्रुटियाँ हुई हैं और राजस्थान पंचायती राज नियमों का पालन नहीं किया गया।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस पूरे मामले को गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा बताते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करेगा।
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