कोहली पर बरसे मांजरेकर: संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट संन्यास पर उठाए सवाल

संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट संन्यास पर उठाए सवाल
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Highlights

  • जो रूट और स्टीव स्मिथ के शतकों के बाद मांजरेकर ने कोहली को लताड़ा।
  • मांजरेकर ने कोहली द्वारा टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के फैसले को चौंकाने वाला बताया।
  • कोहली टेस्ट में 10,000 रन पूरे नहीं कर सके जो उनके करियर का बड़ा लक्ष्य था।
  • पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि कोहली ने अपनी कमियों पर काम करने के बजाय आसान रास्ता चुना।

सिडनी | ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच जारी एशेज सीरीज के दौरान जो रूट और स्टीव स्मिथ ने अपने बल्ले से कोहराम मचा दिया है। रूट ने अपना 41वां और स्मिथ ने 37वां टेस्ट शतक जड़कर क्रिकेट जगत में अपनी बादशाहत साबित की है।

इन दोनों दिग्गजों के शानदार प्रदर्शन को देखकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट संन्यास पर कड़ा प्रहार किया है। मांजरेकर ने कोहली के उस फैसले की आलोचना की है जिसमें उन्होंने रेड बॉल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

मांजरेकर ने कोहली को लगाई लताड़

संजय मांजरेकर ने कहा कि यह देखना काफी दुखद है कि जब रूट और स्मिथ जैसे खिलाड़ी नए रिकॉर्ड बना रहे हैं तब कोहली ने किनारा कर लिया। उन्होंने कोहली पर अपनी समस्याओं से लड़ने के बजाय टेस्ट क्रिकेट छोड़ने का आरोप लगाया है।

मांजरेकर के अनुसार कोहली का यह फैसला सभी के लिए चौंकाने वाला था क्योंकि वह टेस्ट क्रिकेट को बहुत प्यार करते थे। उन्होंने कहा कि भारत के सबसे महान रेड बॉल कप्तान का इस तरह जाना ठीक नहीं था।

10 हजार रनों का अधूरा सपना

विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर में 123 मैच खेले और 46.85 की औसत से कुल 9230 रन बनाए। मांजरेकर ने इस बात पर सबसे ज्यादा दुख जताया कि कोहली अपने करियर में 10,000 टेस्ट रन भी पूरे नहीं कर पाए।

करियर की शुरुआत में 10 हजार रन बनाना कोहली के सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक माना जाता था। मांजरेकर का मानना है कि कोहली जैसे कद के खिलाड़ी के लिए यह आंकड़ा पार करना अनिवार्य होना चाहिए था।

आसान फॉर्मेट चुनने का लगाया आरोप

मांजरेकर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए कोहली की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और मेरा ध्यान बार-बार कोहली पर जाता है।

उन्होंने कहा कि संन्यास लेने से पहले कोहली ने पांच सालों तक टेस्ट क्रिकेट में काफी संघर्ष किया था। मांजरेकर ने सवाल किया कि कोहली ने यह पता लगाने की कोशिश क्यों नहीं की कि उनका औसत 31 तक क्यों गिर गया था।

ऑफ स्टंप की कमजोरी बनी बाधा

साल 2020 और 2025 के बीच विराट कोहली की फॉर्म में गिरावट एक बड़ा चर्चा का विषय बनी रही थी। कोविड महामारी से पहले सभी फॉर्मेट में 50 से ऊपर का औसत रखने वाले कोहली अचानक रनों के लिए तरसने लगे थे।

मांजरेकर ने विशेष रूप से कोहली की ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों पर आउट होने की आदत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोहली ने अपनी इस बड़ी कमजोरी पर काम करने के बजाय टेस्ट क्रिकेट से दूर जाना बेहतर समझा।

डाउन अंडर सीरीज का किया जिक्र

ऑस्ट्रेलिया में अपनी पिछली सीरीज के दौरान कोहली सभी 9 बार ऑफ स्टंप की गेंदों पर ही आउट हुए थे। मांजरेकर ने कहा कि यह बात उन्हें सबसे ज्यादा चुभती है कि कोहली ने सुधार के बजाय हार मान ली।

उन्होंने कहा कि जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन जैसे खिलाड़ी आज भी टेस्ट क्रिकेट में अपना नाम बना रहे हैं। कोहली ने कठिन परिस्थितियों में टिकने के बजाय वनडे जैसे आसान फॉर्मेट में खेलना जारी रखने का फैसला किया।

टेस्ट क्रिकेट के लिए बड़ी क्षति

मांजरेकर ने अंत में कहा कि कोहली टेस्ट क्रिकेट के जीते जागते प्रतीक थे और उनका संन्यास लेना इस फॉर्मेट के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने कोहली के इस फैसले को भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ बताया है।

फैब फोर में शामिल अन्य खिलाड़ी जहां टेस्ट में अपना दबदबा बनाए हुए हैं वहीं कोहली का इस लिस्ट से बाहर होना फैंस को भी खटक रहा है। मांजरेकर की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

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