रामझरोखा मंदिर पट्टे निरस्त: सिरोही रामझरोखा मंदिर भूमि प्रकरण: कलेक्टर का बड़ा एक्शन, नियम विरुद्ध जारी पट्टे निरस्त करने के आदेश

सिरोही रामझरोखा मंदिर भूमि प्रकरण: कलेक्टर का बड़ा एक्शन, नियम विरुद्ध जारी पट्टे निरस्त करने के आदेश
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Highlights

  • सिरोही कलेक्टर अल्पा चौधरी ने रामझरोखा मंदिर भूमि के अवैध पट्टे निरस्त करने के आदेश दिए।
  • नगर परिषद द्वारा नियमों को ताक पर रखकर जारी किए गए थे आठ प्रमुख भूखंडों के पट्टे।
  • पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने बैठाई थी जांच।
  • जांच में मंदिर भूमि के स्वामित्व और उपयोग की प्रकृति में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में रामझरोखा मंदिर की भूमि को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर परिषद सिरोही द्वारा जारी किए गए सभी विवादित पट्टों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया है। इस निर्णय से उन लोगों को बड़ा झटका लगा है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर मंदिर की बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक हासिल कर लिया था। यह कार्रवाई जिले में भू-माफियाओं के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

प्रशासनिक जांच में अनियमितताओं की पुष्टि

रामझरोखा मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की भूमि पर नगर परिषद सिरोही द्वारा नियमों की अनदेखी कर पट्टे जारी किए गए थे। जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया तो कलेक्टर ने एक विशेष जांच दल का गठन किया। जांच में स्पष्ट हुआ कि मंदिर भूमि की प्रकृति और उसके धार्मिक उपयोग के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया था। नगर परिषद ने पट्टे जारी करते समय आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया था। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि भूमि के स्वामित्व के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की संभावना थी।

राजनीतिक घमासान और भ्रष्टाचार के आरोप

इस प्रकरण ने सिरोही की राजनीति में भी उबाल ला दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इस आवंटन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। प्रदर्शनकारियों ने राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और उनके करीबियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। लोढ़ा ने कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में साक्ष्य दिए थे कि कैसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर मंदिर की भूमि को निजी लाभ के लिए आवंटित किया गया। इस विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन पर दबाव बनाया जिससे त्वरित जांच संभव हो सकी।

इन लाभार्थियों के आवंटन हुए रद्द

जिला कलेक्टर के आदेश के बाद जिन लोगों के पट्टे निरस्त किए गए हैं उनमें विनोद मालवीय पुत्र मदनलाल मालवीय के नाम भूखंड संख्या एक, दो और तीन शामिल हैं। इसके अलावा भूखंड संख्या चार पर खुशवंत माली, भूखंड संख्या पांच पर कुलदीप सिंह देवड़ा, भूखंड संख्या छह पर विनोद कुमार देवड़ा, भूखंड संख्या सात पर राकेश कुमार और भूखंड संख्या आठ पर तारा कंसारा के नाम जारी पट्टे अब अवैध घोषित कर दिए गए हैं। प्रशासन अब इन भूखंडों के दस्तावेजों को रिकॉर्ड से हटाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है ताकि भूमि का मूल स्वरूप बहाल हो सके।

दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज

कलेक्टर अल्पा चौधरी ने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि इस पूरे प्रकरण में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी की है उनकी पहचान की जाए। प्रशासन ने नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली विकसित की जाए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि जांच में अधिकारियों की जानबूझकर की गई मिलीभगत साबित होती है तो उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर भूमि के संरक्षण के लिए अब कड़े सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं और स्थानीय समाज में खुशी

इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद रामझरोखा मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में खुशी की लहर है। लोगों ने जिला प्रशासन की निष्पक्षता की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था के केंद्रों की भूमि को बचाना प्रशासन का सराहनीय कदम है। स्थानीय लोगों ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के प्रयासों का भी आभार जताया जिन्होंने इस लड़ाई को जन आंदोलन बनाया। अब इस भूमि को मंदिर के मूल स्वरूप में वापस लाने और इसके संरक्षण की मांग उठ रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मंदिर की संपत्ति के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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