Highlights
धारा 163 लागू होने से 8 फरवरी तक धरना-प्रदर्शन पर रोक। 12 गांवों के ग्रामीण 3 महीने से कर रहे हैं विरोध। 800 हेक्टेयर में प्रस्तावित है चूना पत्थर खनन परियोजना।
सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित पिंडवाड़ा उपखंड क्षेत्र इन दिनों भारी तनाव और विरोध का केंद्र बना हुआ है। प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। हालात को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट अल्पा चौधरी ने रविवार से पूरे पिंडवाड़ा क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी है। यह आदेश 8 फरवरी तक प्रभावी रहेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना है।
यह पूरा विवाद मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पिंडवाड़ा क्षेत्र में करीब 800 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर है। पिंडवाड़ा तहसील की वाटेरा, भीमाणा, भारजा और रोहिड़ा ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 12 गांवों के ग्रामीण पिछले तीन महीनों से इस परियोजना का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बड़ी खनन परियोजना से न केवल पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि स्थानीय जलस्तर और कृषि पर भी बेहद गंभीर प्रभाव पड़ेगा।


संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने 28 जनवरी को एक विशाल धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसमें लगभग 5 हजार लोगों के जुटने की संभावना जताई गई थी। इसी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सार्वजनिक जुलूस, सभाओं और लाउडस्पीकर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ग्रामीणों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पहले प्रशासनिक शिविरों और चुनाव तक के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।
शनिवार को भी ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर नजर आया, जब सैकड़ों की संख्या में लोगों ने 'जनजागृति पदयात्रा' निकाली। यह यात्रा भारजा गांव से शुरू होकर तरूंगी, भीमाणा, वाटेरा और रोहिड़ा से होती हुई देर शाम स्वरूपगंज पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन और पर्यावरण को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। फिलहाल, प्रशासन की ओर से धारा 163 लागू होने के बाद क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और आंदोलनकारियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
राजनीति