जयपुर | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजस्थान कांग्रेस की लड़ाई पर 4 घंटे की मशक्कत के बाद फतेह पा ली गई है।
पायलट कब तोड़ेंगे चुप्पी ? : क्या होगा तीन मांगों का ? सामने नहीं आया अब तक कोई बयान
राजस्थान की जनता को साथ लेकर तीनों गहलोत सरकार के खिलाफ तीन मांगे का अल्टीमेटम देने वाले पायलट के मुंह से अब तक कोई बयान नहीं निकला है। पायलट की इस चुप्पी को देखकर राजनीतिक गलियारों में कई तहर के सवाल उठने लगे हैं।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान की जनता को साथ लेकर तीनों गहलोत सरकार के खिलाफ तीन मांगे का अल्टीमेटम देने वाले पायलट के मुंह से अब तक कोई बयान नहीं निकला है। पायलट की इस चुप्पी को देखकर राजनीतिक गलियारों में कई तहर के सवाल उठने लगे हैं।
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कांग्रेस आलाकमानों का तो यहीं कहना है, कि अब सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच नेतृत्व की लड़ाई थम गई है और दोनों मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
इन सबके बावजूद अभी तक वो सचिन पायलट एकदम शांत नजर आ रहे हैं। राजस्थान की जनता को साथ लेकर तीनों गहलोत सरकार के खिलाफ तीन मांगे का अल्टीमेटम देने वाले पायलट के मुंह से अब तक कोई बयान नहीं निकला है।
पायलट की इस चुप्पी को देखकर राजनीतिक गलियारों में कई तहर के सवाल उठने लगे हैं।
क्या सचिन पायलट अभी भी पूरी तरह से इस सुलह के लिए तैयार नहीं है ? क्या फिर उन पर कोई दवाब है ?
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भले ही पायलट मीडिया के कैमरों के सामने मुस्कुराते दिखे, लेकिन उनकी चुप्पी कुछ और ही बयां करती दिख रही है।
कांग्रेस आलाकमानों ने तो कह दिया है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सचिन पायलट ने आगामी विधानसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ने पर सहमति जताई है।
तो क्या पायलट इन सही में इसके लिए तैयार है ? ऐसा तो नहीं कि जिस तरह पिछले चुनावों में भी वो तैयार हो गए थे और बाद में बिफर गए थे!
जिसके चलते उन्हें अपना उपमुख्यमंत्री पद भी गंवाना पड़ा था।
वहीं दूसरी ओर, सचिन पायलट द्वारा जनता से किए गए वादे और उन्हें पूरा करवाने के लिए किया जा रहा संघर्ष तो उन्हें याद है या वो भी कल की बैठक में चली आंधी में उड़ गए।
पायलट द्वारा प्रदेश की गहलोत सरकार को दिया गया 15 दिन का अल्टीमेटम कल यानि 31 मई को पूरा होने जा रहा है।
पायलट ने कहा था कि वसुंधरा सरकार के दौरान हुए कथित घोटालों की जांच, मौजूदा सरकार के दौरान पेपर लीक मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
पायलट कब तोड़ेंगे चुप्पी ?
सयासी गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह हो गई है तो पायलट ने अब तक आंदोलन नहीं करने का ऐलान क्यों नहीं किया।
अगर पायलट, गहलोत के साथ काम करने को तैयार हो गए हैं तो जिन मुद्दों को उन्होंने अपने उपवास और जनसंघर्ष यात्रा के दौरान उठाया उस पर कांग्रेसी नेता का रुख क्या होगा?
ऐसे में अब पायलट की आगे की रणनीति क्या होती है ये तो उनकी चुप्पी टूटने पर ही पता चल पाएगा।
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