Highlights
- अमित मालवीय ने कांग्रेस सांसदों पर राजस्थान के फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया है
- संजना जाटव, राहुल कसवां और बृजेंद्र ओला के एमपी फंड पर सवाल उठाए गए हैं
- आरोप है कि यह पैसा हरियाणा की कैथल विधानसभा में खर्च करने की सिफारिश की गई है
- नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को इस मामले की जांच कराने की चुनौती दी है
जयपुर | बीजेपी के सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राजस्थान के सांसदों का पैसा हरियाणा के क्षेत्र में खर्च किया जा रहा है. मालवीय के अनुसार संजना जाटव, राहुल कसवां और बृजेंद्र ओला ने अपने एमपी फंड के पैसे को कैथल विधानसभा में खर्च करने की सिफारिश की है.
अमित मालवीय के आरोप
अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस से बड़ी कोई धोखेबाज पार्टी नहीं हो सकती. राजस्थान के करदाताओं के पैसे का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि भरतपुर की सांसद संजना जाटव, चूरू के सांसद राहुल कसवां और झुंझुनूं के सांसद बृजेंद्र ओला ने अपने फंड को हरियाणा के कैथल क्षेत्र में लगाने की बात कही है.
मालवीय ने आगे कहा कि कैथल विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे का निर्वाचन क्षेत्र है. उन्होंने इसे विकास नहीं बल्कि वंशवाद और जनता के पैसे की खुली लूट करार दिया है. मालवीय ने सवाल उठाया कि राजस्थान के लोगों का पैसा सुरजेवाला जूनियर के लिए हरियाणा में क्यों दिया जा रहा है.
टीकाराम जूली का पलटवार
इस पूरे मामले पर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. जूली ने शुरू में कहा कि सांसदों ने नियमों के अनुसार ही फंड का आवंटन किया होगा. उन्होंने तर्क दिया कि राज्यसभा सदस्यों के लिए कुछ पैसा अन्य क्षेत्रों में खर्च करने का प्रावधान होता है.
हालांकि जब उन्हें बताया गया कि यह सिफारिश राज्यसभा नहीं बल्कि लोकसभा सांसदों ने की है, तो उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए. जूली ने कहा कि प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और अधिकारी भी उनके ही हैं. उन्होंने चुनौती दी कि अगर कुछ गलत हो रहा है तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए.
जूली ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे चेक नहीं करते कि कौन सा पत्र कहां भेजा जा रहा है. फिलहाल इस मुद्दे ने राजस्थान और हरियाणा की राजनीति में नया विवाद पैदा कर दिया है. बीजेपी इसे भ्रष्टाचार और वंशवाद का उदाहरण बता रही है जबकि कांग्रेस इसे तकनीकी प्रक्रिया से जोड़ रही है.
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