जयपुर | राजस्थान में मकर संक्रांति का त्योहार केवल एक उत्सव नहीं बल्कि एक गहरा अहसास है। खासकर गुलाबी नगरी जयपुर में इस दिन का जोश और आसमान का नजारा पूरी दुनिया में मशहूर है।
जयपुर काइट फेस्टिवल 2026: जयपुर में मकर संक्रांति पर सजेगा आसमान राजस्थान पर्यटन विभाग ने काइट फेस्टिवल 2026 की तैयारियां की पूरी
राजस्थान पर्यटन विभाग 14 जनवरी को जयपुर के जल महल पर अंतरराष्ट्रीय काइट फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है जहां देशी विदेशी पर्यटक पतंगबाजी का लुत्फ उठाएंगे।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान पर्यटन विभाग 14 जनवरी को जयपुर में अंतरराष्ट्रीय काइट फेस्टिवल आयोजित करेगा। इस भव्य उत्सव का मुख्य केंद्र जल महल होगा जहां देशी और विदेशी सैलानी जुटेंगे। शहर के बाजारों में पतंगों और मांझे की भारी मांग के बीच रौनक बढ़ गई है। मकर संक्रांति का यह पर्व स्वास्थ्य और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
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काइट फेस्टिवल 2026 की तैयारी
राजस्थान पर्यटन विभाग ने इस साल भी काइट फेस्टिवल 2026 की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह आयोजन 14 जनवरी को जयपुर की रौनक बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जल महल बनेगा मुख्य केंद्र
हर साल की तरह इस बार भी उत्सव का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक जल महल को बनाया गया है। सुबह होते ही यहां देशी और विदेशी सैलानियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है।यहां कोई पतंग उड़ाने में माहिर है तो कोई बस आसमान में हो रहे पेंच लड़ाने के रोमांच को देखने आता है। शाम होते-होते जयपुर का नीला आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पूरी तरह ढंक जाता है।
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बाजारों में छाई रौनक
पर्यटन विभाग ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस उत्सव के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है। इसे मनाने के लिए शहर के परकोटे और बाहरी इलाकों के बाजार भी पूरी तरह सज चुके हैं।दुकानों पर नीली और सुनहरी पन्नी वाली पतंगों से लेकर लंबी पूंछ वाली पतंगों की भरमार है। हर गली और नुक्कड़ पर दुकानदार मांझे को धार देने और चरखियां तैयार करने में व्यस्त हैं।
धार्मिक और सेहत का महत्व
मकर संक्रांति का सीधा संबंध सूर्य की चाल से है जब सूरज उत्तरायण की ओर बढ़ता है। माना जाता है कि यह परिवर्तन अपने साथ अच्छी सेहत और सुख लेकर आता है।पुराने समय में ठंड के बाद छत पर घंटों धूप में पतंग उड़ाने से शरीर को विटामिन डी मिलता था। जोधपुर और उदयपुर में भी इसे धूमधाम से मनाते हैं लेकिन जयपुर का कोई मुकाबला नहीं है।
जयपुर की खास पहचान
जयपुर के परकोटे की छतों पर बजने वाले संगीत और वो काटा के शोर की गूंज अलग ही होती है। सर्दियों की विदाई और गर्म दिनों की शुरुआत का यह जश्न जयपुर की असली पहचान है।