जालोर में बजरी माफिया का आतंक: जालोर में बजरी माफिया और पुलिस का गठजोड़, सीएम के अभियान की उड़ रही धज्जियां

जालोर में बजरी माफिया और पुलिस का गठजोड़, सीएम के अभियान की उड़ रही धज्जियां
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Highlights

  • बजरी माफिया का कानून और खाकी की खामोशी 

  • सीएम के अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान का उड़ता मखौल

  • सेवा शुल्क की कीमत के चलते क़ानून की आँखों पर बंधी पट्टी

  • रात में खनन,दिन में परिवहन की छूट देता हर मोड़ पर कर रखा मैनेजमेंट

थिंक-360 जालोर। प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान चलाकर सख़्ती करने के प्रयास कर रहे हो लेकिन जालोर की जमीन पर उनकी सख़्ती रेत पर लिखें अक्षरों की तरह मिटती नजर आ रही हैं।कुल मिलाकर यहां बजरी माफिया का अपना कानून चलता हैं और खाकी हैं जो आंखो पर पट्टी खामोशी भरी हामी के साथ तमाशबीन बनी नजर आ रही हैं।

पुलिस-प्रशासन की नाक के निचे ही नहीं बल्कि उनकी पूरी रजामंदी से बजरी का अवैध खनन और परिवहन बेरोकटोक जारी हैं।ट्रेक्टर-ट्राली थानों और चौकियो के सामने से गुजरती हैं मानो उन्हें कानून से नहीं बल्कि संरक्षण से छूट मिली हो।

ट्रेक्टर नहीं रुकते,रुक जाते हैं सवाल -

अगर सिस्टम ईमानदार होता तो सवाल यह होता कि दिन दहाड़े बजरी से भरी ट्रेक्टर-ट्रालियाँ कैसे सरपट दौड़ रही हैं? लेकिन यहां सवाल पूछे ही नहीं जाते हैं क्यूंकि जवाब पहले से तय हैं-सेवा शुल्क। यही वजह हैं कि पुलिस की कार्रवाई सिर्फ कागजो तक सिमित रहती हैं और धरातल पर बजरी माफिया का राज कायम हैं।

हैड कांस्टेबल का ऑडियो-संरक्षण का कबूलनामा 

जसवंतपुरा थाना क्षेत्र से सामने आया एक कथित ऑडियो इस पूरे गठजोड़ से पर्दा उठाता नजर आ रहा है।थाने में पदस्थ हैड कांस्टेबल भंवरलाल बिश्नोई बातचीत में ना केवल क़ानून से डर रहे हैं बल्कि सरकार की ओर से मौजूदा वक़्त में चलाए जा रहे विशेष अभियान की भी चिंता नहीं कर रहे हैं। ऑडियो में साफ तौर पर सुना जा सकता हैं कि बजरी से भरे ट्रेक्टर को पकड़ने के बाद लेन-देन की बातचीत सेटल होती हैं। बीस हजार रूपये में डील होती हैं लेकिन ट्रेक्टर छोड़ देने के बाद माफिया केवल दस हजार रूपये देता हैं। ऐसे में फिर क्या था हैड साहब बिचोलिये पर भड़क उठते हैं।
ऑडियो में और भी कई बातचीत हो रही हैं। यह ऑडियो केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता हैं।


सीएम का सख्त अभियान या महज दिखावा बड़ा सवाल?

प्रदेश के मुख्यमंत्री अवैध खनन को लेकर सख़्ती दिखाते हुए सयुंक्त टीमों के गठन कर अवैध खनन पर लगाम लगाने का संदेश दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ खाकी के यह हैड कांस्टेबल खुलेआम अपनी रेट तय कर रहे हैं ऐसे में बड़ा सवाल जिमेदारी कौन तय करेगा?
जिम्मेदार सब कुछ जानकर भी अनदेखी कर रहे है क्यूंकि यह केवल एक हैड कांस्टेबल का मामला होता तो बजरी माफिया भी इतना निडर नहीं होता ऐसे में इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि संरक्षण की जड़े ऊपर तक फैली हुई हैं।

अवैध खनन के मसले पर बात करे तो महज दिखावे के लिए एकाध कार्रवाई होती हैं वो भी ऊपरी स्तर से दबाव होने पर केवल और केवल एक-दो ट्रेक्टर मय ट्राली जब्त की जाती हैं ताकि कागजी घोड़े दौड़ाए जा सके।

रात में खनन, दिन में परिवहन और हर मोड़ पर मैनेजमेंट 

पुलिस-प्रशासनिक की खुली छूट के चलते अवैध खनन माफिया रात में खनन करते हैं और दिन में परिवहन का काम बदस्तूर जारी रहता हैं क्यूंकि हर मोड़ पर मैनेंजमेट का काम बखूबी कर रखा होता हैं। यही कारण हैं कि अभियान के बावजूद हालात जस के तस हैं क्यूंकि कुएं में ही भांग गिरी हुई है। कथित ऑडियो के बाद यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि अवैध बजरी खनन की जड़े सिर्फ माफिया तक सिमित नहीं हैं। यहां रक्षक ही भक्षक बने बैठे हैं।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि क्या यह एक्सपोज़ भी बाकी मामलों की तरह फाइलो में दफन कर दिया जाएगा या फिर ऐसी कार्रवाई होगी जो ऐसे भ्रष्ट कारिंदो पर मिसाल होगी।

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