कैलाश चौधरी का पदभार: पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने संभाला किसान मोर्चा का पदभार, मदन राठौड़ बोले लंबी छलांग के लिए पीछे हटना जरूरी

पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने संभाला किसान मोर्चा का पदभार, मदन राठौड़ बोले लंबी छलांग के लिए पीछे हटना जरूरी
Kailash Choudhary
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Highlights

  • कैलाश चौधरी ने किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष का पदभार संभाला
  • मदन राठौड़ ने लंबी छलांग के लिए पीछे हटने की बात कही
  • किसानों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाना मुख्य प्राथमिकता रहेगी
  • मोर्चा अध्यक्ष पद से जुड़ा रहा है जीत का दिलचस्प संयोग

जयपुर | राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद अब पदभार ग्रहण करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने आज बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ भी मौजूद रहे और उन्होंने चौधरी को बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान राठौड़ ने कैलाश चौधरी के नए दायित्व को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणी की जिसने सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी है।

लंबी छलांग का सिद्धांत

जब मदन राठौड़ से यह पूछा गया कि क्या पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को मोर्चे की जिम्मेदारी देना किसी प्रकार का डिमोशन है तो उन्होंने बेहद चतुराई से इसका जवाब दिया। राठौड़ ने कहा कि राजनीति में कई बार लंबी छलांग लगाने के लिए दो कदम पीछे हटना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैलाश चौधरी का कद छोटा नहीं हुआ है बल्कि वे थोड़ा पीछे आकर एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहे हैं। राठौड़ के इस बयान को कैलाश चौधरी के भविष्य के राजनीतिक उत्थान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

किसानों का कल्याण प्राथमिकता

पदभार संभालने के बाद कैलाश चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए अपनी प्राथमिकताओं को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम छोर पर बैठे किसानों तक पहुंचाना उनका मुख्य लक्ष्य है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को सरकार की नीतियों का शत प्रतिशत लाभ मिले और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। चौधरी ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि वे किसानों के हितों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।

अजीब संयोग और इतिहास

बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद के साथ एक बहुत ही दिलचस्प संयोग जुड़ा हुआ है जो पिछले सात सालों से देखने को मिल रहा है। जब कैलाश चौधरी पहले इस पद पर थे तब उन्होंने विधायक का चुनाव हारा था लेकिन बाद में वे सीधे सांसद और फिर केंद्र में मंत्री बने। इसी तरह भागीरथ चौधरी भी किसान मोर्चा अध्यक्ष रहते हुए विधानसभा चुनाव हार गए थे लेकिन बाद में लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र में कृषि राज्यमंत्री के पद तक पहुंचे। यह संयोग दर्शाता है कि इस पद पर रहने वाले नेताओं के लिए भविष्य में बड़े अवसर खुलते हैं।

संगठन में बदलाव की लहर

बीजेपी ने हाल ही में अपने सात मोर्चों में से दो की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को सौंपी है। कैलाश चौधरी के साथ ही निहालचंद मेघवाल को अनुसूचित जाति मोर्चे का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी का यह कदम आगामी स्थानीय चुनावों और उपचुनावों को देखते हुए सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को मोर्चों की जिम्मेदारी देकर पार्टी जमीनी स्तर पर अपने संगठन को और अधिक मजबूत करना चाहती है ताकि सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रभावी ढंग से हो सके।

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