कुंभलगढ़ ईको-सेंसिटिव जोन घोषित: कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर ईको-सेंसिटिव जोन घोषित, 94 गांवों पर लागू होंगे नए नियम

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर ईको-सेंसिटिव जोन घोषित, 94 गांवों पर लागू होंगे नए नियम
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Highlights

  • अभयारण्य के चारों ओर एक किलोमीटर तक का क्षेत्र ईको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है।
  • राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों के कुल 94 गांव इस नए दायरे में शामिल होंगे।
  • चिह्नित क्षेत्र में खनन, भारी उद्योगों और नए होटल-रिसॉर्ट के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
  • राज्य सरकार को दो साल के भीतर पर्यावरण संरक्षण के लिए आंचलिक मास्टर प्लान तैयार करना होगा।

उदयपुर | केंद्र सरकार ने अरावली की पहाड़ियों में स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर के क्षेत्र को पारिस्थितिकी-संवेदी क्षेत्र घोषित कर दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।

प्रतिबंध और प्रभावित क्षेत्र

नए नियमों के अनुसार अभयारण्य की सीमा से सटे 243 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले 94 गांवों में सख्त पाबंदियां लागू होंगी। इन क्षेत्रों में अब खनन गतिविधियों, बड़े औद्योगिक उपक्रमों और ईंट-भट्टों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

इसके अलावा नए होटल और रिसॉर्ट बनाने पर भी पाबंदी रहेगी ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप कम किया जा सके। यह निर्णय अरावली के इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने हेतु लिया गया है।

जैव विविधता का संरक्षण

कुंभलगढ़ अभयारण्य राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में फैला हुआ है जो बनास और लूणी नदी प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र की दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना है।

स्थानीय निवासियों की आवासीय जरूरतों और गैर-प्रदूषणकारी लघु उद्योगों को विशेष नियमन के तहत अनुमति दी जाएगी। पारिस्थितिकी पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

मास्टर प्लान की तैयारी

राज्य सरकार को अगले दो वर्षों के भीतर स्थानीय लोगों के परामर्श से एक विस्तृत आंचलिक मास्टर प्लान तैयार करना होगा। इस योजना में जलस्रोतों के संरक्षण, वन पुनर्स्थापन और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।

जैव विविधता की रक्षा के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल आजीविका के अवसरों को भी इस योजना में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इससे क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा और पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता बनी रहेगी।

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