माउंट आबू शरद महोत्सव विवाद: माउंट आबू शरद महोत्सव 2025 में प्रोटोकॉल विवाद, विधायक ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

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Highlights

  • विधायक समाराम गरासिया ने प्रशासन पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया।
  • महोत्सव के विज्ञापनों और होर्डिंग्स से मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री की तस्वीरें नदारद रहीं।
  • तीन दिवसीय आयोजन पर खर्च हुए करीब एक करोड़ रुपये के बजट पर उठे सवाल।
  • क्षेत्रीय सांसद और स्थानीय नेताओं को कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियों से दूर रखा गया।

माउंट आबू | राजस्थान के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू में आयोजित शरद महोत्सव 2025 अब अपनी चमक के बजाय एक बड़े राजनीतिक विवाद के कारण चर्चा में आ गया है। इस तीन दिवसीय उत्सव के समापन के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच तल्खी चरम पर पहुंच गई है। आबू पिण्डवाड़ा के विधायक समाराम गरासिया ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे सरकार और शीर्ष नेतृत्व का सीधा अपमान करार दिया है। विधायक का आरोप है कि इस सरकारी कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और शिष्टाचार की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं।

प्रोटोकॉल के उल्लंघन का गंभीर आरोप

विधायक समाराम गरासिया ने आरोप लगाया है कि महोत्सव के लिए जो आधिकारिक आमंत्रण पत्र और विज्ञापन छपवाए गए थे उनमें मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री की तस्वीरें ही गायब थीं। सिर्फ यही नहीं स्थानीय विधायक और सांसद के फोटो को भी होर्डिंग्स और पोस्टरों में जगह नहीं दी गई। विधायक का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी मनमानी करते हुए पूरे कार्यक्रम को संचालित किया और जानबूझकर जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज किया। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि जिस भी स्तर पर यह चूक हुई है उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

करोड़ों के बजट और फिजूलखर्ची पर सवाल

विवाद केवल तस्वीरों और पोस्टरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब इस महोत्सव पर हुए भारी भरकम खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि इस तीन दिन के आयोजन पर करीब एक करोड़ रुपये की बड़ी सार्वजनिक राशि खर्च की गई है। आरोप लग रहे हैं कि जनता के टैक्स के इस पैसे का सही उपयोग नहीं हुआ और यह कार्यक्रम आम जनता और पर्यटकों के लिए होने के बजाय अधिकारियों का निजी जलसा बनकर रह गया था। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इस बजट का उपयोग पर्यटन सुविधाओं को सुधारने में किया जा सकता था।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और नाराजगी

पोलो ग्राउंड में हुए मुख्य कार्यक्रमों के दौरान भी प्रशासनिक अधिकारियों का ही दबदबा देखने को मिला। विधायक का आरोप है कि उन्हें सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए हरी झंडी दिखाने हेतु बुलाया गया था और उसके बाद पूरे तीन दिनों तक उन्हें और अन्य प्रमुख नेताओं को आयोजन की मुख्य गतिविधियों से दूर रखा गया। हैरान करने वाली बात यह भी रही कि क्षेत्रीय सांसद लुम्बाराम चौधरी और जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी जैसे बड़े नेता भी इस आयोजन में नजर नहीं आए। विधायक अब इस गंभीर लापरवाही की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री दीया कुमारी से करने वाले हैं।

पर्यटन की छवि पर पड़ता असर

माउंट आबू जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर इस तरह का प्रशासनिक विवाद पर्यटन की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। जानकारों का कहना है कि जब कभी भी शरद महोत्सव या ग्रीष्म समारोह आयोजित करने के लिए बैठक होती है तो उसमें क्षेत्रीय विधायक और सांसद की राय लेना अनिवार्य होना चाहिए। लेकिन यहां अधिकारियों और नगर पालिका के कार्मिकों ने अपनी मर्जी से सब कुछ तय किया। फिलहाल मनमानी के रूप में भव्य आयोजन संपन्न तो हो गया लेकिन जनप्रतिनिधियों की अनदेखी अब राजस्थान की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सभी की नजरें जयपुर से आने वाले संभावित आदेशों पर टिकी हैं।

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